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Azamgarh News: दूध की पौष्टिकता में घोल रहे मिलावट का जहर

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आजमगढ़। जिसे हम अमृत समझते हैं, अब वही मिलावटखोरी के चलते स्वास्थ्य के लिए विष बनता जा रहा है। यह हम नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले छह महीने में दूध के 46 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। जिसमें 36 नमूने फेल हो गए। मतलब साफ है कि दूध में मिलावट की गई थी और उसे लोग पौष्टिक समझ कर पी रहे थे। मिलावटी दूध की बिक्री की पुष्टि होने पर 13 लोगों पर 78 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
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जनपद में मिलावटखोरी का कारोबार फल-फूल रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अप्रैल 2023 से 30 सितंबर तक कुल 154 नमूने जुटाए गए। जांच में इन नमूनों में 61 प्रतिशत नमूने फेल हो गए। इनमें से 20 नमूने ऐसे थे जो मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और 81 नमूने अधोमानक के मिले।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक कुल 383 नमूने जुटाए गए। इन नमूनों को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया। पिछले वर्ष के साथ इस वर्ष की विभाग को कुल 510 जांच रिपोर्ट आई। जिसमें 184 नमूने अधोमानक पाए गए। जबकि 43 नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिले। इसके साथ ही 68 नमूने ऐसे मिले जो मिस ब्रांडेड पाए गए। वहीं अप्रैल 2023 से 30 सितंबर तक विभाग द्वारा कुल 1559 स्थानों का निरीक्षण किया गया। 152 छापा मारकर 154 नमूने जुटाए गए। पिछले वर्ष और इस वर्ष की मिलाकर विभाग कुल 191 रिपोर्ट प्राप्त हुई। जिसमें 81 नमूने अधोमानक मिले, 20 नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। वहीं 16 नमूने मिथ्या छाप के पाए गए।
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दूध में मिली सबसे ज्यादा मिलावट

आजमगढ़। दूध में मिलावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त है। उसके निर्देश के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग ने छह महीने में 46 नमूने लिए। इन नमूनों को जब जांच के लिए भेजा गया तो इसमें से 36 नमूने फेल पाए गए।
मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों की बिक्री पर है कारावास
आजमगढ़। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि मिथ्या छाप और अधोमानक सामान की बिक्री पर मामले को एडीएम प्रशासन की कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है। वहां से अर्थदंड लगाया जाता है, लेकिन जो पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं उनमें अर्थदंड के साथ ही कारावास की भी सजा है। इसका निर्धारण एसीजेएम कोर्ट से होता है।
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केस एक
सिधारी थाना क्षेत्र के चकनामी गांव निवासी मिर्जा अहद की दुकान से 1992 में खड़ी हल्दी का नमूना लिया गया था। यह नमूना जांच में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया था। इस मामले को एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। एसीजेएम ने सुनवाई के बाद इस मामले में आरोपी को छह माह कारावास और 2000 रुपये का अर्थदंड लगाया।
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केस दो
इसी तरह से बरदह थाना क्षेत्र के ठेकमा बाजार स्थित हरिलाल की दुकान से टीम ने बेसन के लड्डू का नमूना लिया था। जांच में यह नूमना मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। सुनवाई के बाद एसीजेएम में इस मामले को आरोपी को छह माह का कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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