आजमगढ़। शैदा साहित्य मंडल के तत्वावधान में बृस्पतिवार की शाम गीतों भरी शाम मां भारती के नाम काव्य संध्या का आयोजन आराजीबाग में किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपनी भावनाओं को दर्शाया। कार्यक्रम का शुभारंभ गीतकार व शायर सेठ राजकुमार ने मां शारदे की वंदना सुनाकर किया। इसके बाद राजनाथ राज ने ‘‘विषधरों को दूध है बछड़ों को सूखी घास है, हाकिमों हक इनका दे दो अगर तनिक एहसास है’’ सुनाकर सभी को वर्तमान व्यवस्था पर सोचने को मजबूर कर दिया। बैजनाथ गवार ने ‘‘तू त सपना हो गइला अब भेटइबा कइसे, अब रोआवत हवा हंसइबा कइसे’’ सुनाकर एक प्रेमिका की वेदना को दर्शाने का प्रयास किया। हास्य कवि शैलेंद्र मोहन राय अटपट ने ‘‘सबला ह नारी ह मरदन प भारी, छोड़े न तनको उधारी हो रामा सबला ह नारी’’ सुनाकर पति, पत्नी के बीच होने वाले चुलबुली नोकझोंक को उजागर करते हुए सभी को आनंदित किया। इसके बाद दुष्ट धर्माचार्यों के क्रिया कलापों पर प्रहार करते हुए ‘‘धइले हाथे धरम पतवार बा, जिया बेकरार बा जिया बेकरार बा ना’’ सुनाकर माहौल को खुशनुमा कर दिया। अंत में संस्था के महामंत्री विजेंद्र श्रीवास्तव ने अए हुए सभी कवियों के प्रति आभार जताया।