आजमगढ़। पानी अमृत बनने से पहले ही अमृत सरोवरों के जीर्णोद्धार की मुहिम धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरोवर के पानी को अमृत बनाने के लिए काफी प्रयास किया गया, लेकिन कई सरोवर बदहाल पड़े हैं। पानी लगभग सूख गया है। ज्यादातर सरोवर में कीचड़ और खर-पतवार की भरमार है।
आजादी का अमृत महोत्सव 2022 में शुरू हुआ तो तय हुआ था कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर का निर्माण कराकर स्वतंत्रता दिवस पर वहीं ध्वजारोहण होगा। नतीजा यह हुआ कि अमृत सरोवर के निर्माण की रफ्तार ध्वजारोहण तक ही सीमित रह गई। इसके बाद जिम्मेदारों ने सरोकार रखना बंद कर दिया।
जिले में 1300 अमृत सरोवर का निर्माण किया जा रहा था। इसमें 580 अमृत सरोवर का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। वहीं 650 से अधिक अमृत सरोवर निर्माणाधीन हैं। बजट के अभाव में काम ने ऐसी सुस्ती पकड़ी कि अभी तक 50 प्रतिशत गांवों भी अमृत सरोवर नहीं बन पाए हैं।
जबकि अगस्त 2024 तक सभी ग्राम पंचायतों में निर्माण का लक्ष्य था। इसके बाद भी आज भी आधा-अधूरे पड़े हैं। जिन सरोवरों का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, धरातल पर उसकी भी हालत बहुत खराब है। ज्यादातर सरोवर सूखे पड़े हैं तो कई में गंदा पानी जमा हो रहा है। कुछ में जमा कीचड़, इनकी खूबसूरती के दावों का सच बयां कर रहा है।