महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के रांगेय राघव शोधपीठ की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जाग उठ मेरे हिंदुस्तान’ का मुख्य सार्वजनिक सत्र शनिवार को हरिऔध कला भवन में हुआ।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने युवाओं से जागरूक होकर राष्ट्र और समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल राजनीतिक व्यवस्था से नहीं, बल्कि उसकी दीर्घ सांस्कृतिक परंपरा से बनी है।
कुलश्रेष्ठ ने युवाओं से जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर कर्म, योग्यता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को केवल जातिगत पहचान से नहीं, बल्कि उनके कार्य और विचारों से समझना चाहिए।
संगोष्ठी में रांगेय राघव की साहित्यिक चेतना, राष्ट्रीय भावना और भारतीय ज्ञान परंपरा पर वक्ताओं ने विचार रखे। इस अवसर पर ‘भारत में राष्ट्रीय चेतना का विकास : रांगेय राघव के संदर्भ में’ पुस्तक का विमोचन किया गया।
पुस्तक के संपादक पूर्व कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता तथा सह-संपादक डॉ. मनीषा सिंह हैं। पूर्व कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता ने कहा कि रांगेय राघव और महाराजा सुहेलदेव की स्मृति युवाओं में राष्ट्रबोध जगाने वाली है।
रांगेय राघव शोधपीठ के प्रभारी एवं संगोष्ठी संयोजक प्रो. सुजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि रांगेय राघव बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उन्होंने 150 से अधिक पुस्तकों की रचना की और सामाजिक व राष्ट्रीय परिस्थितियों पर मुखरता से विचार व्यक्त किए। ‘जाग उठ मेरे हिंदुस्तान’ उनकी राष्ट्रचेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है।
विभाग प्रचारक दीनानाथ ने भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरण पर विचार रखे। कार्यक्रम के संरक्षक एवं कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने संगोष्ठी के आयोजन को रांगेय राघव की साहित्यिक विरासत और युवा पीढ़ी के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
सह-संयोजक सूर्य प्रकाश अग्रहरि ने आयोजन में सहयोग दिया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी समेत बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।