वर्तमान समय में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला भले ही सामुदायिक शौचालयों की पड़ताल कर रहे हों लेकिन ग्राम प्रधान व सचिव उनकी एक नहीं सुन रहे हैं। इसकी बानगी पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह द्वारा गोद लिए तमौली गांव में देखने को मिल रही है। यहां शौचालय बाहर से तो चकाचक है। अंदर बना है या नहीं यह किसी को नहीं पता। कारण कि निर्माण होने के बाद से अब तक एक दिन भी यह शौचालय नहीं खुले हैं। जबकि यहां पर कागजों में समूह की महिलाओं की ड्यूटी लगा दी गई है। मानदेय भी लिया जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। शासन का मकसद था शौचालय बनेंगे तो जिनके पास सुविधा नहीं है, वह लोग इनका उपयोग कर सकेंगे। इसके लिए भारी भरकम धनराशि खर्च कर शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग व्यवस्था की जा रही है। लेकिन, जिम्मेदारों की उपेक्षा से शौचालय निर्माण सार्थक नहीं हो रहा। सामुदायिक शौचालयों में ताले शोभा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को काफी समस्याएं भी आ रही हैं। पल्हनी ब्लाक के तमौली गांव व जाफरपुर गांव में बने शौचालय में बनने के बाद ताला लगा दिया गया था। इसमें एक दिन भी जरूरतमंद को जाने का मौका नहीं मिला। लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं। बारिश में तो बाहर जाना खतरनाक भी है, क्योंकि विषैले जीव जंतुओं का खतरा रहता है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी गांवों को जाना और जन सुविधाओं व समस्याओं को जानना नहीं चाहते। लिहाजा ब्लाक में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालय निरर्थक साबित हो रहे हैं। लगभग हर ग्राम पंचायत का यही हाल है। इन शौचालयों को बने एक से दो साल बीत चुके हैं।