आजमगढ़। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और फोरलेन सड़कों का निर्माण तेजी से चल रहा है। शहर और ग्रामीण इलाकों में मकान भी बन रहे हैं। ज्यादातर निर्माण बिना ढंके किया जा रहा है। निर्माणाधीन सड़कों पर भी पानी छिड़काव के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। नतीजतन इन जगहों से उड़ने वाली धूल शहर की आबोहवा को खराब कर रही है। कोहरे के साथ मिलकर धूल के कण लोगों की सेहत खराब कर रहे हैं।
जनपद में कोई बड़ा औद्योगिक केंद्र नहीं है लेकिन वर्तमान में शहर में विकास कार्य तेजी से हो रहा है। जगह -जगह भवनों का निर्माण हो रहा है। तो पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। यही निर्माण अब शहर की आबोहवा को दूषित करने में लगे हैं। नए भवनों के निर्माण के दौरान मिट्टी भराई के लिए ट्रैक्टरों से मिट्टी ढोई जाती है। ट्रालियों में भरी मिट्टी उड़ती रहती है। वहीं जनपद में हो रहे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और फोरलेन के निर्माण में लगी कार्यदायी संस्थाओं द्वारा भी पानी छिड़काव के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है।
जनपद मंडल मुख्यालय इसके बावजूद प्रदूषण की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी का कहना है कि कई बार पत्र व्यवहार किया गया लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हुई। हालांकि तमाम पर्यावरण पर काम करने वाले संगठनों अपने स्तर से एयर क्वालिटी इंडेक्स नापने का दावा करते हैं। एक्यू एयर संस्था के आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 144 के आसपास था जो सांस को रोगियों को दिक्कत देने वाला है। इसी तरह एक और संस्था ने लालगंज के पास वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आसपास आंका था। यह स्थिति निर्माणाधीन सड़कों पर वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल और ठंड के कारण है।
वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा दिक्कत श्वांस रोगियों को होती है। धूल के छोटे-छोटे कण सांसों के रास्ते शरीर के अंदर पहुंचकर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति की हालत को भी खराब कर सकते हैं। डा. राजनाथ, वरिष्ठ फिजिशियन, मंडलीय जिला अस्पताल।
जनपद में अभी तक प्रदूषण की जांच की सुविधा नहीं है। हमारी ओर से शासन को पत्र भेजा गया है। संभावना है कि मार्च महीने से यहां भी प्रदूषण के तर की जांच शुरू हो जाएगी।-ओएस सिद्दीकी, वैज्ञानिका सहायक, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय