गंभीरपुर के सरसेना खालसा गांव में करीब आठ माह पहले हुई बसपा नेता विजय बहादुर की हत्या वर्चस्व की जंग में हुई थी। पुलिस ने बुधवार की शाम फरिहां मोड़ से भाड़े के दो शूटरों को गिरफ्तार इस हत्याकांड का खुलासा किया। शूटरों को गांव के ही एक व्यक्ति ने एक लाख रुपये की सुपारी दी थी।
पुलिस लाइंस में गुरुवार को एएसपी नगर विनोद कुमार ने बताया कि सरसेना खालसा गांव के रहने वाले बसपा नेता विजय बहादुर की उन्हीं के गांव के उब्बैदुल्लाह और शौकत के बीच वर्चस्व की जंग चलती थी। उनकी सास फूला देवी के पार्टी पदाधिकारी होने से विजय के आगे इन दोनों की नहीं चलती थी। आरोप है कि उब्बैदुल्लाह और शौकत खेत के बगल की ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर रहे थे, जिसका विजय ने विरोध किया था।
बकौल एएसपी, विजय बहादुर से परेशान इन लोगों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए गांव के ही आपराधिक छवि के एक व्यक्ति से संपर्क साधा। उसने जौनपुर के खेतासराय के मोहियुद्दीनपुर गांव के एहसान खान और सुंबुलपुर गांव के अनीश को विजय की हत्या के लिए एक लाख रुपये की सुपारी दी। इसके बाद छह नवंबर 2014 की रात एहसान और अनीश खालसा गांव पहुंचे। वहां उन्हें शौकत ने लाइसेंसी राइफल और तमंचा दिया।
इसके बाद इन लोगों ने विजय की हत्या कर दी। बुधवार की शाम एहसान और अनीश फरिहां मोड़ पर उब्बैदुल्लाह से सुपारी की रकम लेने आए थे, जब उन्हें पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसओ गंभीरपुर एसएन वर्मा, स्वाट टीम और सर्विलांस टीम के अधिकारी शामिल थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त राइफल और मोबाइल भी बरामद कर लिया। पुलिस फरार अन्य तीनों आरोपियों की तलाश कर रही है।
बेगुनाहों ने काटी ढाई माह की जेल ः विजय बहादुर की हत्या के बाद उनकी सास फूला देवी ने मेहनगर के गौरा गांव निवासी अशोक सिंह और भूपेंद्र सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना का कारण गौरा गांव में चल रहा कोटे का विवाद बताया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कर जेल भेज दिया, मगर आरोपियों ने पेशी के दौरान कोर्ट में अपनी व्यथा सुनाई और बेगुनाह होने का सबूत सौंपा।
इसके बाद 25 जनवरी को ढाई महीने बाद ये दोनों रिहा हो गए। विजय बहादुर की गौरा गांव में ससुराल है। उनकी सास अपने गांव का कोटा लेना चाहती थीं, जबकि अशोक और भूपेंद्र सिंह उनके खिलाफ थे। 31 दिसंबर 2014 को इसे लेकर गांव में पंचायत भी हुई थी। इसमें विवाद हो गया। इधर बीच छह नवंबर 2014 को विजय की हत्या हो गई और सास का शक अशोक और भूपेंद्र की तरफ घूम गया।
इस मामले की जांच सीओ सदर कर रहे थे, लेकिन फूला देवी ने डीआईजी के यहां प्रार्थना पत्र देकर सीओ पर पक्षपात का आरोप लगाया था। इसके बाद जांच बलिया के बैरिया के सीओ को दे दी गई। उनकी जांच में भी अशोक और भूपेंद्र निर्दोष पाए गए। इसके बाद पुन: जांच एसओ गंभीरपुर और क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। तमाम बिंदुओं पर जांच करने, सर्विलांस, मोबाइल की कॉल डिटेल आदि का अध्ययन करने के बाद पुलिस वारदात की तह तक पहुंची।