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तिरंगे में लिपटा सैनिक का पार्थिव शरीर पहुंचा घर, मचा कोहराम

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सगड़ी। असम राइफल्स के जवान तिरंगे में लिपटे तहसील क्षेत्र के गोपईपुर शेखमौली गांव निवासी सैनिक बहादुर राम का पार्थिव शरीर लेकर बृहस्पतिवार दोपहर उनके घर पहुंचे तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। परिजनों समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
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गोपईपुर गांव निवासी बहादुर राम 15 मई 1985 को सेना की मेडिकल कोर में फार्मासिस्ट के रूप में भर्ती हुए। तब से देश की सेवा में अनवरत तैनात रहे। तिम्मालौंग जनपद के मणिपुर में असम राइफल्स की टुकड़ी के साथ 12 जुलाई सोमवार को दो बजे गश्त करते समय हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। असम राइफल्स के 12 जवान पार्थिव शरीर को लेकर उनके गृह जनपद गोपईपुर गांव पहुंचे, जहां नायब तहसीलदार सगड़ी मयंक मिश्रा ने राजकीय सम्मान के साथ पुष्प चक्र अर्पित किया। इस दौरान मौजूद सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा के दौरान बहादुर राम अमर रहे के नारे लग रहे थे। मऊ जिले के दोहरीघाट मुक्तिधाम पर गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र दीपक राम ने दी। उन्हेंदो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। पत्नी मंजुला का निधन सन 2015 में ही हो गया था। बीते अप्रैल माह में वे पुत्र दीपक की शादी में घर आए थे। छोटे पुत्र राहुल का विवाह नहीं हुआ है। उनकी दो पुत्रियां रंजना, अंजू, दीपक, राहुल का रो-रोकर बुरा हाल रहा। वही ग्राम प्रतिनिधि राजेंद्र यादव, जिला पंचायत सदस्य जनार्दन राव, अर्जुन कुमार, रामवृक्ष गौतम, पूर्व बीडीसी, आशीष कुमार, लेखपाल शेषनाथ मौर्य, पूर्व महा प्रधान बालमुकुंद चौहान, रामजन्म यादव आदि मौजूद रहे।
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