घर के रहन-सहन की संस्कृति को अपनी रचना का आधार बनाया जा सकता है। भारतीय समाज खासकर पूर्वांचल का वह क्षेत्र जो आजमगढ़ के नाम से जाना जाता है, किस्साओं का क्षेत्र है। इन्हीं स्रोतों को आधार में रखकर सृजन को साकार किया जा सकता है। ये बातें दिल्ली से 15वें पुस्तक मेले में हिस्सा लेने आई प्रख्यात कथाकार और स्तंभकार क्षमा शर्मा ने शिब्ली नेशनल पीजी कालेज के सभागार में आयोजित 'कहानी से चित्र और चित्र से कहानी लेखन' कार्यशाला और 'कथा और साहित्य' विषयक गोष्ठी में कहीं। गोष्ठी में दूर-दूर से आए विद्वानों ने कथा और साहित्य विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
गोष्ठी में काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मंजुला चतुुर्वेदी ने कहा कि चित्रकला मनुष्य की प्राचीनतम अभिव्यक्ति का स्वरूप और माध्यम है। प्रकृति के सौंदर्य को कला के माध्यम से बहुत सहज और सुंदर ढ़ंग से अभिव्यक्त किया जाता है। यह कार्यशाला साहित्य और कला के अंतर्संबंधों की समीक्षा और सृजन का विस्तार है। हम धरती की संतान हैं और उस प्रकृति के श्रोत हमारे जीवन का आधार है। ऐसे में विध्वंस के विरुद्ध हमें सृजन की यात्रा आरंभ करनी होगी।
शिब्ली एकेडमी के सीनियर फेलो मौलाना उमेर सिद्दीक नदवी ने कहा कि हम बचपन में बाल साहित्य पढ़कर साहित्य की राह पर चले। खिलौना, बूढ़ी काकी, ईदगाह जैसी कहानियों के संस्कार से ही हमारे साहित्य की समझ विकसित हुई। आज बाजार ने हमसे हमारे साहित्य को दूर किया है। संचालन करते हुए मेले के समन्वयक राजीव रंजन ने कहा कि नेशनल बुक ट्रस्ट की पहल पर विद्वानों का साक्षात्कार साहित्य को आमजन तक पहुंचाने का नया प्रयोग है। शनिवार को मेले में विद्यार्थियों के लिए पुस्तक समीक्षा होगी। इसकी थीम संस्कृति का साहित्य जैसे गोदान, पूस की रात जैसी कृतियां विमर्श का आधार होंगी। इस मौके पर उपकृषि निदेशक डा. आरके मौर्य, राजीव पांडेय, लवकुश सिंह, एजाज, एहसान, परवेज, बनवारी लाल जालान, अबू मोहम्मद आदि उपस्थित थे।
पुस्तक मेले में शुक्रवार को 'कहानी से चित्र और चित्र से कहानी लेखन' विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला का संयोजन राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र नई दिल्ली के संपादक द्विजेंद्र कुमार ने किया। कार्यशाला में चार सौ से अधिक बच्चों ने भागीदारी की। इसमें बच्चों से आपबीती और यात्रा वृतांत लिखने के लिए कहा गया। जिन बच्चों ने चित्रकला में रूचि प्रकट की, उन्हें एक कहानी के आधार पर चित्र बनाने के लिए कहा गया। द्विजेंद्र कुमार ने कहा कि कार्यशाला में बच्चों द्वारा लिखी गई मौलिक रचना को नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका पाठक मंत्र बुलेटिन में प्रकाशित किया जाएगा। कार्यशाला में प्रतिभागियों को 10 हजार रुपये की किताबें उनकी पसंद के अनुसार वितरित की गई।