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छुट्टा पशुओं से निजात के लिए बनाए जा रहे अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल

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आजमगढ़। जिले के नगरीय और ग्रामीण इलाकों में 42 गोवंश आश्रय स्थल बनने के बाद भी छुट्टा पशुओं से निजात नहीं मिल सकी है। ऐसे में छुट्टा पशुओं को रखने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल (पशु बाड़ा) बनाए जा रहे हैं। अभी तक सात अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए हैं। बाकी ग्राम पंचायतों में पशु आश्रय स्थल प्रस्तावित हैं।
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जिले में 42 गोवंश आश्रय स्थल हैं लेकिन छुट्टा पशुओं से किसानों को मुक्ति नहीं मिल सकी है। झुंड में पशु किसानों के खेतों में जाकर फसल चट कर जा रहे हैं। किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने अभियान चलाकर पशुओं को पकड़कर गोवंश आश्रय स्थल में रखने के निर्देश दिया है। पशुओं को रखने में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाने का प्रस्ताव मांगा गया था। जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत में जरूरत के हिसाब से अस्थायी पशु आश्रय स्थल (पशु बाड़ा) बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत पशुपालन विभाग द्वारा सात न्याय पंचायतों में पशुबाड़ा बनाया गया है। बाकी में प्रस्ताव तैयार किया गया है। भूमि भी चिह्नित की जा रही है।
इन स्थानों पर बनने हैं नये अस्थायी पशु आश्रय केंद्र
जनपद में अब तक सात स्थानों पर जगह पर अस्थायी पशु आश्रय स्थल (पशु बाड़ा) बनाए गए है जबकि अन्य ग्राम पंचायतों में यह कार्य प्रस्तावित है। मेंहनगर में एक, पल्हना में एक, लालगंज में तीन, कटघर में एक, ठेकमा में दो, मार्टीनगंज में छह, फूलपुर में चार, अहरौला में एक, पवई में तीन, कोयलसा में दो, अतरौलिया में तीन, महराजगंज में दो, हरैया में दो, अजमतगढ़ में एक, सठियांव में चार, पल्हनी में एक, रानी की सराय में दो, मुहम्मदपुर में एक, मिर्जापुर में एक और तहबरपुर में तीन अस्थायी पशु आश्रय केंद्र (पशु बाड़ा) बनाए जाने हैं।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायतों में अस्थायी पशु आश्रय स्थल (पशु बाड़ा) का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए कार्य भी कराया जा रहा है। सात स्थानों पर आश्रय स्थल का निर्माण हो चुका है। शेष स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जल्द ही इनका निर्माण भी पूरा करा लिया जाएगा।
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