बलरामपुर। पूर्व में कफ सिरप के कारण हुई घटनाओं को देखते हुए कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसका परिणाम है कि जिला अस्पताल में चिकित्सक सब्सीट्यूड के तौर पर टैबलेट और इंजेक्शन के सहारे बच्चों का इलाज कर रहे हैं। वैसे जिला अस्पताल में एंब्रोक्सोल हाइड्रोक्लोराइड सिरप मौजूद है। इसे बच्चों के बजाए बड़ों की खांसी ठीक करने में प्रयोग किया जा रहा है।
जिला अस्पताल आजमगढ़ के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शहानी ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 मरीज आ रहे हैं, जिनमें से 12 से 13 मरीज सर्दी, जुकाम, खांसी और निमोनिया से पीड़ित होते हैं। सर्दी के मौसम में सबसे ज्यादा इम्युनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे काफी प्रभावित होते हैं।
जिला अस्पताल में कफ सिरप तो है लेकिन इसे बच्चों को नहीं दिया जा रहा है। इससे बड़ों की खांसी का इलाज किया जा रहा है। रही बात बच्चों की तो चिकित्सकों की ओर से बच्चों को कफ सिरप के स्थान पर टैबलेट और इंजेक्शन देकर इलाज किया जा रहा है।
टैबलेट और इंजेक्शन के साथ भाप लेने की सलाह
जिला चिकित्सालय में इस समय बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। 12 से 13 बचे सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। ऐसे बच्चों की खांसी को ठीक करने के लिए चिकित्सकों की ओर से ब्रांकोडिजोर टैबलेट और इंजेक्शन लिखा जा रहा है। साथ ही उनके अभिभावकों को उन्हें भाप देने की सलाह दी जा रही है।
सर्दी में सबसे ज्यादा परेशानी पांच वर्ष तक के बच्चों को होती है। इनमें खांसी की समस्या सबसे अधिक आती है। ऐसे में कफ सिरप प्रतिबंधित होने के बाद उन्हें टैबलेट देने के साथ भाप लेने की सलाह दी जा रही है। अगर स्थिति गंभीर है तो इंजेक्शन भी लगाया जा रहा है। - डा. मुकेश साहनी, बाल रोग विशेषज्ञ।