सठियांव। जनपद की इकलौती औद्योगिक इकाई दि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव परिक्षेत्र में गन्ना उत्पादन का रकबा गत वर्ष की तुलना में इस बार कम हो गया है, जो जिले के लिए अच्छा संकेत नहीं है। वहीं प्रबंधन तंत्र वैश्विक महामारी कोरोना को कारण बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं पूर्व उपसभापति घटतौली, मिल गेट पर गन्ना किसानों से अर्ली व सामान्य के नाम पर धनउगाही, भुगतान में लेटलतीफी के साथ पर्ची का सही वितरण न होने को कारण बताया।
मिल परिक्षेत्र में वर्ष 2018-19 में गन्ने का सर्वे 20 हजार पांच सौ हेक्टेयर था। जो चालू सत्र में घटकर 14 हजार पांच सौ हेक्टेयर हो गया। गन्ना बोने से किसानों का मोह क्यों भंग हो रहा है। वहीं मिल से जुड़े किसान प्रतिनिधि मंडल व मिल प्रशासन के विचार अलग अलग हैं। मुख्य गन्ना अधिकारी डा. विनय कुमार सिंह व डायरेक्टर कौशल कुमार सिंह ने गन्ना कम बुआई के पीछे भुगतान में देरी और कोरोना को मुख्य कारण बताया है। जबकि प्रतिनिधि राम अवध यादव, सुभाष सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीते सत्र में उपलब्ध कराई गई गन्ना सर्वे रिपोर्ट फर्जी थी। वहीं पूर्व उपसभापति आनंद उपाध्याय ने मिल प्रशासन पर कई आरोप लगाया। जिसमें मुख्य रूप से घटतौली, कलेंडर के अनुसार पर्ची का जारी न होना, भुगतान में देरी, क्रय केंद्रों पर अर्ली व सामान्य प्रजाति के नाम पर किसानों से धनउगाही उनके साथ मारपीट करना शामिल है। बतादें कि सत्र 2017-18 में गन्ने की सर्वे रिपोर्ट में 1800 हजार हेक्टेयर गन्ना बुआई दिखाया गया है। वैसे कारण जो भी हो जांच का विषय है।