फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नजरों में समा गई मेजवां की चिकनकारी

Sat, 30 Apr 2016 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आजमगढ़
विज्ञापन
मेजवां स्थित चिकनकारी सेंटर का निरीक्षण करती फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी।
विज्ञापन
एक समय में सुविधाओं के नाम पर शून्य मेजवां गांव की सूरत वर्ष 1980 में प्रख्यात शायर कैफी के प्रवास करने के दौरान जो बदली तो बदस्तूर अभी भी जारी है। शायर पिता के बाद अभिनेत्री पुत्री के प्रयास से आज यह गांव आदर्श की श्रेणी में हैं, साथ ही ग्रामीण खुशहाल है। क्योंकि मूलभूत सुविधाओं से लबरेज इस गांव में लड़कियां की शिक्षा के लिए विद्यालय और रोजगार के लिए चिकनकारी कारखाना है। यहां के महिला कारीगरों के द्वारा की गई चिकनकारी आज विश्व पटल पर छाई है, साथ मेजवां का नाम विश्वपटल पर गूंजने लगा है।
विज्ञापन



फूलपुर तहसील क्षेत्र के मेजवां गांव की कुल आबादी 600 के करीब है। हर तरह से पिछड़े इस गांव में 70 के दशक में आने जाने के लिए सड़क भी नहीं था। लोग पगडंडी से होकर जाने को विवश थे। लेकिन 1980 में जब प्रख्यात शायर कैफी आजमी शहरी जीवन से उबकर अंतिम समय में अपने मातृ भूमि पर आकर रहने लगे, तो उन्होंने गांव की दशा सुधारने का प्रयास किया। इसी क्रम में 1992 में स्व. आजमी ने मिजवां सोसायटी की स्थापना की, जो आगे चलकर गांव के लोगों के लिए रोजगार का साधन बना। इससे पूर्व इस गांव के लोग जीविकोपार्जन के लिए मुंबई, कोलकाता, दिल्ली आदि महानगरों में जाते थे।

इस सोसाइटी के माध्यम से गांव की महिलाओं को चिकनकारी जैसे कलात्मक विधा से जोड़ा गया। आज सैकड़ों महिलाएं इससे जुड़ी हैं। बाद में मशहूर फैशन डिजाइनर अनीता डोगरे और मनीष मल्होत्रा को संस्था से जोड़ा गया। जिसके चलते महिलाएं स्वत: रोजगार के तहत आत्मनिर्भर हो रही है। आज की स्थिति है कि घर बैठे-बैठे महिलाएं प्रतिमाह 3000 से लेकर 4000 रुपये रुकमा रही हैं। इसके साथ गांव में लड़कियों के लिए कन्या इंटर कालेज, कंप्यूटर सेंटर सहित अन्य तरह की सुविधाओं को मुहैय्या कराया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें