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भटके मानसून ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल

Mon, 11 Jul 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
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धान की खेती
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एक तरफ मौसम विज्ञानी जहां अच्छी बारिश की संभावना जता रहे हैं। वहीं झलक दिखलाने के बाद गायब हुए मानसून ने किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। सूख रही फसलों को बचाने की चुनौती किसानों  के सामने खड़ी हो गई है। 
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मौसम विज्ञानियों की बातों पर विश्वास कर बहुत से किसानों ने बहुत पहले की धान की नर्सरी डाल दी थी। जैसे ही मानसून की पहली बारिश हुई किसानों को लगा कि मानसून आ गया। किसानों ने खेेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी। बहुत से किसान धान की रोपाई कर भी चुके हैं लेकिन दो दिन हल्की फुल्की बारिश के बाद मानसून तो जैसे रास्त ही भटक गया। हालत यह हो गई है किसानों के खेत में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं।

किसान अपनी गाड़ी कमाई को इस तरह से सूखता देख परेशान है। फसल को बचाने के लिए किसान निजी साधनों से खेतों में पानी चलाने में लगा हुआ है। लेकिन उनका मानना है कि अगर बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना कठिन होगा। क्योंकि विगत कई वर्षों में हुई कम बारिश से जलस्तर काफी नीचे चला गया है। जिसके कारण ट्यूबवेल भी पानी छोड़ रहे हैं। 
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के अंजान शहीद गांव के प्रधान सुभान, रामदरश सिंह, मनोज यादव, बेचू प्रजापति, सुनील, दीपक का कहना है कि बारिश न होने से फसल बर्बाद हो रही है। जिनके पास टयूबवेल हैं वह अपने खेतों में ही पानी चला रहे हैं। जब उनके खेत में सिंचाई हो जाएगी तब वह दूसरों को देंगे।
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