आजमगढ़। जिले में स्वास्थ्य महकमे के कोविड-19 पोर्टल में सेंध लग गई है। बिना हेल्थवर्कर हुए भी एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर टीकाकरण कार्ड के साथ फोटो अपलोड कर टीकाकरण कराने का दावा किया है। आखिर ऐसा हुआ कैसे, यह बताने को स्वास्थ्य महकमा तैयार नहीं है और सिर्फ जांच कराने अथवा फोटो फेक होने की बात कह रहा है।
शासन ने कोरोना टीकाकरण के प्रथम चरण में सिर्फ फ्रंट लाइन हेल्थ वर्करों के टीकाकरण की योजना बनाई थी। इन्हीं फ्रंट लाइन हेल्थ वर्करों का नाम कविड-19 पोर्टल पर दर्ज भी किया गया था। स्वास्थ्य महकमे के अनुसार जिले में पहले चरण के लिए कुल 16089 हेल्थ वर्कर पंजीकृत किए गए थे। इसमें सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों के स्टाफ शामिल थे। अन्य फ्रंट लाइन वर्करों के लिए अब तक टीकाकरण की कोई डेट निर्धारित नहीं है। इसके बाद भी जिले में बिना हेल्थ वर्कर हुए ही टीकाकरण कराने का एक व्यक्ति ने दावा किया है। संबंधित व्यक्ति ने अपने फेसबुक पर बृहस्पतिवार को टीकाकरण कार्ड के साथ फोटो अपलोड किया है। इसके साथ ही उसने यह मैसेज भी डाला है कि मैने कोरोना का टीका लगवा लिया है। टीकाकरण जिला महिला अस्पताल बूथ पर करवाए जाने का दावा किया गया है। वहीं स्वास्थ्य महकमा हेल्थ वर्करों को छोड़ किसी अन्य का टीकाकरण होने से इंकार रहा है, लेकिन जिस व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर टीकाकरण कराने का दावा किया है, वह कैसे हेल्थवर्कर है, यह भी महकमा पुष्ट नहीं कर पा रहा है। वहीं मीडिया द्वारा इस बाबत जानकारी दिए जाने के बाद से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर अपलोड फोटो व टीकाकरण के दावे को फेक बता कर महकमा बचने की कवायद में जुटा हुआ है।
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जिस व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर टीकाकरण कराने का दावा किया है वह हेल्थ वर्कर नहीं है। कैसे उसका टीकाकरण हुआ, इसकी जांच कराई जा रही है। प्रथम चरण में सिर्फ व सिर्फ हेल्थवर्कर का ही टीकाकरण होना है।
डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ, आजमगढ़।
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कोविड-19 पोर्टल में सेंधमारी संभव ही नहीं है, यदि कोई बिना हेल्थवर्कर हुए टीका लगवाने का दावा कर रहा है तो वह गलत है। फिर भी यदि ऐसा है तो जांच कराई जाएगी और जिस भी स्तर पर गड़बड़ी हुई होगी, कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. संजय, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, आजमगढ़।