जनपद में कुल 35 अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। वर्तमान में छह अंत्येष्टि स्थल निर्माणाधीन हैं। आज इनमें ज्यादातर अंत्येष्टि स्थलों के शेड गायब हो चुके हैं। कुछ अंत्येष्टि स्थलों तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के गौसपुर ग्रामसभा में महर्षि दत्तात्रेय आश्रम के बगल में तमसा नदी के किनारे बनाया गया शव दाह गृह लगभग 10 वर्ष पहले 18 लाख की लागत से बनाया गया था। यहां पर लगाए गए टीनशेड अपने आप हवा में उड़ गए और जो बचे हैं उसमें जगह-जगह बड़े-बड़े होल हो गए हैं। अहरौला : खेमकरनपुर ग्राम सभा के कल्होरा धाम में तमसा नदी के किनारे विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक के प्रस्ताव पर जिला योजना समिति के द्वारा अंत्येष्टि स्थल के लिए शासन को प्रस्ताव 2021 में भेजा गया था। 2022 में 26 लाख रुपए से अंत्येष्टि स्थल का निर्माण हुआ। लेकिन यह अनियमितता की भेंट चढ़ गया। अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए मार्ग भी नहीं है। पवई : अंडिका गांव में नदी के किनारे छह वर्ष पहले 24 लाख की लागत से अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया। लेकिन फर्श टूट चुके हैं। परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। टीन शेड उखड़ चुका है। शौचालय व स्नानघर का निर्माण तो हुआ है लेकिन शौचालय में सीट अभी तक नहीं लगी है। और ना ही दरवाजा खिड़की लगे हुए हैं। ठेकमा : सरायमोहन गांव में बेसो नदी किनारे अंत्येष्टि स्थल का निर्माण किया गया है। बनने के बाद आज तक उसकी मरम्मत नहीं हो पाई। टिनशेड आंधी तूफान में से उड़ गए हैं। वहां जाने के लिए रास्ता कच्चा बना है जिस पर काफी घासें उग आई हैं।
बिंद्राबाजार : मोहम्मदपुर विकास खंड की आठ ग्राम पंचायतों में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया है। जिसमें दयालपुर ग्राम पंचायत में अभी तक निर्माणाधीन है। मंगई नदी के पास बने अंत्येष्टि स्थल पर अंधेरा फैल जाता है। डीपीआरओ श्रीकांत दर्वे ने बताया किअंत्येष्टि स्थलों का निरीक्षण कर उनकी कमियों को परखा जाएगा। जो भी कमियां वहां पाई जाएंगी उसे दूर किया जाएगा। यदि कहीं कब्जा पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।