मतदाता सूची में विकास यादव का नाम 13 बार दर्ज होने और समाजवादी पार्टी की तरफ से मुद्दा उठाए जाने पर हुई जांच के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने दोषी बीएलओ गीता देवी-प्रथम, गीता देवी-द्वितीय, सुनीता देवी, शीला देवी (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) एवं उमेश कुमार यादव (रोजगार सेवक) और कंप्यूटर सहायक संजय कुमार प्रजापति को मतदाता सूची संबंधी कार्य से हटा दिया है। सेवा समाप्ति के लिए सभी को नोटिस दिए गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/ तत्कालीन सदर एसडीएम नरेंद्र गंगवार, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी डॉ. मोनिका अग्रवाल (आयुर्वेदिक चिकित्सक) और माधवेंद्र प्रताप सिंह (तत्कालीन नायब तहसीलदार सदर) के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत कार्रवाई किए जाने से पूर्व उनको आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
निर्वाचन आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में पाया गया कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 347-आजमगढ़ की मतदाता सूची में विकास यादव का नाम 13 बार अंकित था। इनमें से दो प्रविष्टियों का नियमानुसार विलोपन किया जा चुका है। शेष 11 प्रविष्टियां आजमगढ़ के 11 अलग-अलग व्यक्तियों से संबंधित हैं, जिनमें से 10 के नाम और विवरण में संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरवाया गया है। वहीं, आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को जनपद के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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सोशल मीडिया पर खबर प्रसारित होने के बाद मामले की तत्काल जांच कराई गई। जांच कराकर रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई है। जिम्मेदार बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शेष दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई प्रचलित है। - रविंद्र कुमार डीएम/जिला निर्वाचन अधिकारी आजमगढ़।