मदरसों में नियुक्तियों के मामले में सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मदरसा संचालकों ने फर्जी तरीके से शिक्षकों की भर्ती कर दी। शासन के निर्देश पर अनुदानित मदरसों की हुई जांच में लगभग एक दर्जन से अधिक अध्यापकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में खामी दिखाई गई थी। शासन से शिकायत की गई तो इसमें एसआईटी जांच बिठा दी गई है। तब से यह जांच चल रही है। इसी को लेकर गुरुवार को एसआईटी की टीम आजमगढ़ में पहुंची। देरशाम तक करीब नौ विद्यालयों में पहुंचकर जांच-पड़ताल की। हालांकि इस बारे में जांच टीम व जिले स्तर के अधिकारी कुछ भी बताने से कतराते रहे। वहीं मदरसा संचालकों में हड़कंप सरीखा माहौल बना रहा।
जुलाई 2017 में शासन के निर्देश पर जनपद में 20 अनुदानित मदरसों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न मदरसों में मानक समेत अन्य कमियों के साथ एक दर्जन से अधिक शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति को भी अनियमित बताया गया था। मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की गई थी। इसके बाद शासन के निर्देश पर मार्च 2020 में उक्त शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर फिर रोक लगा दी गई। इसके साथ ही प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। कुछ दिन बाद जांच ठंडे बस्ते में चला गया। शासन के सख्त निर्देश पर एक बार फिर से मदरसों की जांच शुरू हो गई। गुरुवार को एसआईटी की टीम आजमगढ़ में पहुंची। एसआईटी टीम में शामिल इंस्पेक्टर अनुपम सिंह व संजय सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे। जिसमें स्थानीय अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल थे। इंस्पेक्टर अनुपम सिंह से जब सवाल जवाब किया गया तो वह कुछ भी बताने से कतराती रही। बस उनका एक ही जवाब था कि हमे उच्चाधिकारियों की ओर से आजमगढ़ जिले के 20 मदरसों की सूची मिली है। हम उसी सूची के आधार पर मदरसों का सत्यापन कर रहे हैं। हम अब तक आठ मदरसों का सत्यापन कर चुके है। नौवां जीयनपुर के चुनुगपार मदरसा में पहुंचे है। इस अवसर पर एसआईटी की टीम के साथ ही चुनुगपार मदरसा के प्राचार्य रियासत हुसैन सहित सभी शिक्षक मौजूद रहे।