आजमगढ़। जिला अस्पताल में तैनात नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्राहास के प्रोन्नति प्रकरण में फर्जीवाड़ा हुआ है। जिसकी पुष्टि मंडालयुक्त के निर्देश पर हुई जांच में हो चुकी है। इसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रोन्नति प्रकरण में एसआईसी ने गलत रिपोर्ट मुख्यालय को प्रेषित किया है। जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रहास के प्रोन्नति को लेकर एसआईसी डॉ. एके सिंह ने निदेशालय को अपनी आख्या के साथ पत्र भेजा है। जिसमें डॉ. चंद्रहास के सर्विस रिकार्ड की कमियों को नहीं दर्शाया गया है। जिसकी शिकायत भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री रविशंकर तिवारी ने मंडलायुक्त से किया। अपने शिकायती पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. चंद्रहास के पदोन्नति के लिए एसआईसी ने जो संस्तुति भेजा है। उसमें खेल किया गया है। डॉ. चंद्रहास के सर्विस बुक के कमियों को छुपाते हुए रिपोर्ट निदेशालय को भेजी गई है। 2009 में इन पर जननी सुरक्षा योजना के 20 लाख के गबन का भी आरोप है। इतना ही 1994 से 1998 तक इनकी सेवा भी ब्रेक रही है। लेकिन एसआईसी ने चंद्राहस के सेवा पुस्तिका के इन कमियों को उजागर नहीं किया है। मंडालयुक्त ने जिलाधिकारी के माध्यम से इस प्रकरण की जांच कराई। जिलाधिकारी ने सीएमओं को जांच कर आख्या मांगी। जिस पर सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. एके सिंह व जिला प्रशासनिक अधिकारी बीके मिश्रा को जांच सौपी। इन दोनों ने अपनी जांच में आरोप की पुष्टि कर दिया है। इसके बाद भी जांच रिपोर्ट अब तक दबी पड़ी हुई है। एसीएमओ व जांच अधिकारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि मंडलायुक्त के निर्देश पर चल रही जांच अभी जारी है। पदोन्नति वाले प्रकरण में एसआईसी ने जो संस्तुति किया है उसमें उन्होंने वर्तमान का जिक्र किया है, पूर्व के प्रकरण में डॉ. चंद्रहास सजा काट चुके है। वैसे अभी जांच की कवायद चल रही है। जांच पूरी होने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।