ब्लाक के चिश्तीपुर के कौलेश्वर धाम (कैलीस्थान) पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा के छठवें दिन मंगलवार को भक्तों ने श्रीराम वनवास की कथा का रसपान किया। मथुरा से पधारे अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि वचनों की रक्षा के लिए श्रीराम ने राजपाठ त्याग दिया।
कहा कि भगवान श्रीराम ने अपनु कुल की मर्यादा को ध्यान में रखकर और अपने पिता के वचन को बचाने के लिए प्रसन्न होकर सारा राजापाठ त्याग कर वन चले गए। इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि हमें स्वयं की चिंता न करते हुए यदि जरुरत पड़े तो अपने परिवार, समाज और देश के लिए सबकुछ त्याग देना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के बुजुर्गो को राजा दशरथ से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्हें अपने वारिस को सारी जिम्मेदारी देकर स्वयं भगवान के सुमिरन में लगना चाहिए।
अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि सभी को प्रसन्न रहने की प्रेरणा भगवान श्रीराम से लेनी चाहिए। कौशिल्या के ऊपर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेटे को वनवास होने के बाद भी उन्हें अपने पति के वचन याद रहें। जब भगवान राम वनवास के लिए निकलते हैं तो भरत सहित सभी अयोध्यावासी उनके पीछे निकल पड़ते हैं।
अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। मुख्य यजमान अजय कुमार कसौधन, नगर पंचायत अतरौलिया की अध्यक्ष सावित्री देवी, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सुभाष चंद्र जायसवाल, द्वारिका प्रसाद जायसवाल, शंभू दयाल गुप्ता, प्रदीप जायसवाल, जितेंद्र सोनी, हीरालाल वर्मा, छांगुर प्रसाद जायसवाल आदि उपस्थित रहे।