बलिया से लखनऊ जाते समय पर प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव मंगलवार रात अतरौलिया स्थित प्रसपा के जिलाध्यक्ष रामप्यारे यादव के आवास पर रुके। इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि कानून पूंजीपतियों के इशारे पर बनाए गए हैं और किसानों के खिलाफ हैं। इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। पार्टी के सपा में विलय की चर्चाओं को अफवाह बताते हुए कहा कि गठबंधन का विकल्प खुला है।
उन्होंने कहा कि कांट्रैक्ट फार्मिंग का कानून पूंजीपतियों के हित में है। सरकार खेती की जमीन उद्योगपतियों को देना चाहती है। इससे किसान मजदूर बनकर रह जाएंगे। किसान नेताओं ने राजनीतिक पार्टियों को मना किया है। अगर मना नहीं किया होता तो हम भी उनके मंच पर होते। हम किसानों के साथ हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बहुत सारे मुद्दे हैं।
भाजपा ने कहा था कि अच्छे दिन आएंगे, किसानों की आय दोगनी कर देंगे, दो करोड़ नौजवानों को नौकरी देंगे लेकिन कुछ कर नहीं पाए। भ्रष्टाचार दस गुना बढ़ गया है। कहा कि चुनाव गैर भाजपावाद पर ही लड़ा जाएगा। धर्मनिरपेक्ष दलों व समान विचार वाली पार्टियों को एकजुट करके ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।