मेजवां। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामनेई की मौत पर गहरा दुख जताया है। लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत पूरी मिल्लत इस्लामिया के लिए दुख की बात है। उलेमाओं ने इस दुख की घड़ी में सभी से शांति और सद्भाव बनाने की अपील की है। शिया धर्म गुरु मौलाना व अध्यापक हुसैन हैदर वकार ने कहा कि आज से चौदह सौ साल पहले एक दौर था जालिम बादशाह यजीद का जो इमाम हुसैन को झुकाना चाहता था। लेकिन इमाम हुसैन ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दे दी लेकिन झुके नहीं। अमेरिका और इजराइल वर्षों से चाह रहे थे कि खामनेई को मार कर ईरान की सत्ता हासिल कर ली जाए। खामनेई की शहादत को लोग हमेशा याद करेंगे। शिया धर्म गुरु मौलाना कमर अब्बास ने कहा कि खामनेई की मौत सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं बल्कि विश्वस्तर पर गम की बात है। मौलाना खामनेई की शहादत मिल्लत का अजीम नुकसान है। वे हमेशा कहा करते थे मैं दुनिया में रहूं या न रहूं लेकिन इस्लाम जिंदा रहे। दो मुल्क के हुक्मरान वर्षों से यही चाहते थे कि ईरान पर कब्जा कर लें और वहां के सर्वोच्च नेता को मार दें। उनकी शहादत कि निंदा सारी दुनिया कि इंसानियत कर रही है।
मौलाना कमर अब्बास रिजवी। संवाद