आजमगढ़। जनपद न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में 31 अक्टूबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र प्रताप सिंह ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद बंदियों को जेल में शिविर का आयोजन कराकर उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
उन्होंने जेल में निरूद्ध ऐसे बंदी जिन्होंने अपनी सजा का 14 वर्ष पूर्ण कर लिया है। उन्हें सोनाधर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य में पारित निर्णय से भी जागरूक किया गया। जेल में निरूद्ध बंदियों को नालसा द्वारा चलाए जाने वाले अभियान ‘हक हमारा भी तो हैञ्च75 से संबंधित मूलभूत कानूनी सहायता से जागरूक किया गया। निरीक्षण के दौरान बंदियों द्वारा बताया गया कि उन्हें समय से भोजन दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान कुछ महिला तथा पुरूष बंदियों द्वारा बताया गया कि उन्हें चिकित्सीय सुविधायें समय से उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिसपर पर सचिव ने संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया कि वह समय से बंदियों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराएं। सचिव ने शिविर में उपस्थित बंदियों से वार्ता की तथा उन्हें नि:शुल्क पैरवी के लिए अधिवक्ता की आवश्यकता के संबंध में पूछा। शिविर में उपस्थित अधिकांश बंदियों ने बताया कि उनके मुकदमों की पैरवी के लिए उनके पास अधिवक्ता है। कुछ बंदियों द्वारा बताया गया कि उनके पास पैरवी करने के लिए अधिवक्ता नहीं है, जिसपर सचिव ने जेल अधिकारी को निर्देशित किया कि वे जिला कारागार से पत्र के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र प्रेषित कर संबंधित बंदियो को अधिवक्ता उपलब्ध करा सकते है। इस दौरान सचिव ने कहा कि ऐसे बंदी जो अत्यन्त गरीब हैं, जिनका कोई पैरोकार नहीं है, ऐसे बंदी को निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के पात्र है। इस मौके पर जेलर विकास कटियार तथा जेल के अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।