परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश रविवार को खत्म हो रहे हैं। सोमवार से विद्यालय खुलेंगे। मगर जिले के ज्यादातर स्कूलों के परिसर में जलभराव व झाड़ियां वजूद में आ चुकी है। जहरीले कीड़ों से लेकर गंदे पानी से बच्चों में संक्रमण होने की संभावना अधिक है। इसे लेकर अभिभावक चिंतित हैं। विद्यालयों में कायाकल्प के तहत मोटा बजट खपाया गया लेकिन जलभराव को खत्म करने की दिशा में कोई विशेष कवायद नहीं की गई। यह समस्या उन स्कूलों की है, जहां जलनिकासी की व्यवस्था ठीक नहीं है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई मुश्किलों के बीच ही बनी रहती है। सोमवार को बच्चे इस समस्या से जूझेंगे। बच्चों की संख्या कम रहने की संभावना भी है। बीएसए के निर्देश हैं कि विद्यालयों में साफ-सफाई करा ली जाए, लेकिन जलभराव की समस्या कैसे दूर होगी। जहरीले कीड़े भी बच्चों के लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं। अमर उजाला की पड़ताल में जिले के दर्जनों विद्यालयों में यह समस्या ढाई गई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय लछिरामपुर के परिसर में जलभराव से घास उग आई है। विद्यालय का ज्यादातर हिस्सा पानी में डूबा है। गंदे पानी के बीच से होकर बच्चे स्कूल भवन तक पहुंचेंगे। परिसर में जलभराव निकासी को लेकर प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में उनके अभिभावकों को बच्चों को लेकर चिंतित होना स्वभाविक है। शिक्षा क्षेत्र अहरौला के ज्यादातर विद्यालयों के परिसरों में जलभराव का संकट है। इसकी बानगी प्राथमिक विद्यालय युद्धिष्ठर पट्टी में देखने को मिल रही है। विद्यालय में जलभराव के अलावा झाड़ियां भी पनप आईं है। ऐसे में संक्रमण के साथ ही कीड़ों की समस्या से बच्चों को निपटना पड़ेगा। विद्यालय को जाने वाला रास्ता भी गंदगी से पटा हुआ है। बीएसए समीर कुमार बताया कि सोमवार से विद्यालय खुल जाएंगे। विद्यालयों में साफ-सफाई पूरी हो चुकी है। जहां तक रही बात विद्यालयाें के परिसर में पानी भरने की तो इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो संबंधित को निर्देश दिया जाएगा।