अक्षय तृतीया पर सराफा बाजार में सोना, चांदी के जेवर खरीदने वालों की काफी भीड़ देखी गई। बड़ी संख्या में लोगों ने आभूषणों की खरीदारी की। व्यापारियों की माने तो पूरे सराफा बाजार से एक करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ है।
त्योहार के इस मौके पर ग्राहकों को लुभाने के लिए दूकानदारों ने हीरा पर 25 प्रतिशत डिस्काउंट दिया था और हालमार्क वाले 22 कैरट सोने पर कोई छूट नहीं दिए जाने के बाद भी इसकी खरीदारी हुई।
संस्कार ज्वेलर्स के प्रोपराइटर श्री रुंगटा ने बताया कि नोटबंदी के कारण इस बार खरीदारी कम होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन इस वर्ष दो वर्ष से बेहतर खरीदारी हुई। सोना, चांदी के जेवरों की खरीदारी नकद रुपयों से कम डेविड और क्रेडिट कार्ड से ज्यादा की गई है। खरीदारी पर नोटबंदी का असर कम रहा प्रधानमंत्री की कैशलेस योजना का असर काफी रहा।
इस वर्ष पूरे सराफा बाजार में एक करोड़ से ज्यादा की बिक्री का होना बताया जा रहा है। गत वर्ष अक्षय तृतीया पर एक करोड़ से कम की बिक्री हुई थी। उधर, दैवज्ञ दुर्वाषा मंडल मुन्ना बाबा का कहना है कि अक्षय तृतीया बैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया साढ़े तीन मुहूर्त में एक मुहूर्त है। इस दिन किया हुआ पाप और पुण्य अक्षय हो जाता है। अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
मेष संक्रांति पड़ने वाले पर्वो में अक्षय तृतीया मुख्य पर्व होता है। इस दिन दान का बड़ा महत्व होता है। भगवान् श्रीकृष्ण को चन्दन का लेपन करने से समस्त मनोकामनाए पूर्ण हो जाती हैं। विवाह आदि मांगलिक कार्य के लिए अतिशुभ दिन के रूप में अक्षय तृतीया जाना जाता है। इस दिन विवाह भी संपन्न कराए जाते हैं। अक्षय तृतीया के बिना मुहूर्त के भी गृह प्रवेश द्विरागमन गृहारंभ गोदान यज्ञोपवित संस्कार कुम्भदान तुला दान किए जाते हैं।