अपनों का इंतजार कर रहे परिजन
बताया कि भाई 15 जनवरी, 2024 को विनोद, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंट के साथ गए उनको गार्ड और हेल्पर की नौकरी के लिए ले जाया गया। रूस पहुंचने के बाद उन्हें जबरन ट्रेनिंग देकर आर्मी में युद्ध के लिए भर्ती कर दिया गया।
बताया कि भाई से अंतिम बार मई 2024 में बात हुई थी इसके बाद से भाई का कुछ पता नहीं चल सका है। भाई ने फोन पर बताया था कि 9 मई 2024 को युद्ध में उन्हें चोट लग गई थी। एंबेसी से हम लोगों ने बहुत कोशिश की लेकिन जानकारी नहीं मिल सकती है।
शहर के गुलामी का पूरा निवासी अजहरूद्दीन को 27 जनवरी 2024 को एजेंट विनोद अपने साथ लेर गया था। अजहरुद्दीन की मां नसरीन रो रोकर कहती हैं कि विनोद मेरे घर आया और बोला, सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी है, दो लाख रुपया महीना मिलेगा।
मोटी तनख्वाह का दिया जा रहा लालच
सैलरी अच्छी समझकर मेरा बेटा वहां चला गया। जब बेटा वहां गया तो दो महीने तक तो हम सभी से बात होती रही। इसी बीच बेटे को ट्रेनिंग देकर लड़ाई के मैदान में भेज दिया गया। फिर एक दिन सूचना मिली कि युद्ध में बम गिरने से बेटा घायल हो गया।
यह बात जब अजहरूद्दीन के अब्बू मैनुद्दीन को पता चली तो उन्हें एक अप्रैल को हार्ट अटैक आ गया और आठ अप्रैल को उनकी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद हमने एजेंट विनोद से अपने बेटे से बात कराने की जिद की लेकिन उसने बात नहीं कराई। हमारे पास तो इलाज के भी पैसे नहीं थे। गहने बेचकर इलाज कराया फिर भी अजहरूद्दीन के अब्बू नहीं बचे।
मेरी बेटे से अंतिम बात 27 अप्रैल को हुई थी। तब उसने कहा था कि अम्मी छह महीने तक यहां काम करूंगा और लौट आऊंगा लेकिन आज तक उसका पता नहीं चला है। इसी तरह से अन्य लोगों का भी कहना है कि उन्हें कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के नाम पर वहां भेजा गया और छोटी से ट्रेनिंग देकर जंग के मैदान में भेज दिया गया।