जिन पुलिसकर्मियों को रोडवेज और यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है, वे रोडवेज के पास प्राइवेट बसों में सवारियां बैठाने में खलासियों की मदद करते हैं। इसके एवज में उन्हें सुविधा शुल्क मिलता है। इससे रोडवेज की आय पर विपरीत असर पड़ रहा है। रोडवेज के आरएम और एआरएम ने डीएम, एसपी और आरटीओ से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
प्रदेश के 10 प्रमुख डिपो में आजमगढ़ भी है। यहां से सरकारी खजाने में प्रत्येक माह एक से डेढ़ करोड़ रुपये जमा होता है। इन दिनों रोडवेज भवन का निर्माण होने की वजह से बसें डिपो के आसपास खड़ी होती हैं। नियम है कि सरकारी डिपो से दो सौ मीटर दूर प्राइवेट बस अड्डा होना चाहिए।
बावजूद इसके प्राइवेट बस ऑपरेटर अपनी बसों को रोडवेज के आसपास ही खड़ी करते हैं और जबरन सवारियों को अपनी बसों में बैठाते हैं। यह मारामारी खासतौर से वाराणसी की ओर जाने वाली बसों में रहती है। सवारी के चक्कर में कई बार प्राइवेट और सरकारी कर्मचारियों में मारपीट भी हो चुकी है। आरोप है कि प्राइवेट बस चालकों का साथ पुलिस वाले और आरटीओ के कुछ कर्मचारी भी दे रहा है। रोडवेज के पास जाम न लगे, इसके लिए यहां सिपाहियों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन वे निजी बस आपरेटरों से मिलीभगत करके निजी बसों में सवारियां बैठाते हैं।
रोडवेज प्रशासन की ओर से हमें कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है। एआरएम की पत्र भेजने की बात गलत है। यह जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना है। शीघ्र ही रेडवेज, पुलिस और आरटीओ विभाग की बैठक कर सबकी जिम्मेदारी सुनिशि्चत की जाएगी। - सुहास एलवाई, डीएम
बसों को खड़ा करवाने और पकड़ने की जिम्मेदारी आरटीओ विभाग की है। अगर कोई पुलिसकर्मी पैसे लेकर इस तरह का काम कर रहा है तो उसके खिलाफ जांचकर कार्रवाई की जाएगी। - अजय कुमार साहनी, पुलिस अधीक्षक
रोडवेज के पास ही प्राइवेट बस चालक गाड़ी खड़ी कर सवारी भरते हैं। इन्हें रोडवेज परिसर से दूर करने के लिए कई बार डीएम, एसपी और आरटीओ विभाग से लिखित शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्राइवेट बसों की वजह से आमदनी भी प्रभावित हो रही है। पुलिस वालों की मिलीभगत से प्राइवेट आपरेटर यह काम कर रहे हैं। - संतोष श्रीवास्तव, एआरएम अंबेडकर डिपो