आजमगढ़। कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने बीते माह मंडल के तीनों जनपदों में गड्ढामुक्त की गई सड़कों की रैंडम आधार पर जांच कराई तो पीडब्ल्यूडी की पोल खुलकर सामने आ गई। जांच में वो सड़कें भी खस्ताहाल मिली जिनके बारे में कमिश्नर को बताया गया था कि ये गड्ढामुक्त हो गई हैं। सड़कों की स्थिति अत्यंत दयनीय मिलने पर तकनीकी समिति गठित कर गड्ढामुक्त कराई गई सड़कों की शत प्रतिशत जांच कराने और मंडल के तीनों जनपदों के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और अन्य दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए संस्तुति शासन को भेज दी गई है। लोक निर्माण विभाग की ओर से वर्ष 2019-20 में मंडल में गड्ढामुक्त कराई गयी सड़कों की जो सूची उपलब्ध कराई गई है उसमें आजमगढ़ और मऊ की 55-55 तथा बलिया की 81 सड़कें शामिल हैं।
पांच से 30 फीसदी ही गड्ढामुक्त मिली सड़कें
आजमगढ़। स्थलीय सत्यापन मंडलीय अधिकारियों के माध्यम से कराया गया था। कमिश्नर ने बताया कि आजमगढ़ में पांच गड्ढामुक्त सड़कों का निरीक्षण अधीक्षण अभियंता जल निगम एमसी श्रीवास्तव ने किया। सभी सड़कों की स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई। गड्ढामुक्ति का प्रतिशत 5 से 30 तक ही सीमित पाया गया। मऊ में सात सड़कों का रैंडम स्थलीय सत्यापन अधीक्षण अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण वीके सिंह गौर ने किया। यहां भी सड़कें उखड़ी हुई, गड्ढों से भरी एवं जर्जर पाई गईं। बलिया में पांच सड़कों के सत्यापन में स्थिति आजमगढ़ और मऊ जैसी ही पाई गई।
अब शासन से होगी कार्रवाई
आजमगढ़। कमिश्नर ने कहा कि स्थलीय सत्यापन से स्पष्ट होता है कि गड्ढामुक्त कराई गई सड़कों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता शासन की मंशा के अनुरूप नहीं है। लोनिवि ने इस संबंध में भ्रामक सूचना दी थी। व्यापक पैमाने पर दुरुपयोग किए जाने की संभावना है। इससे शासन की छवि भी धूमिल हुई है। अनियमितता औरा शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए तकनीकी समिति गठित कर गड्ढामुक्त कराई गई सड़कों की शत प्रतिशत जांच कराने और मंडल के तीनों जनपदों के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है।