आजमगढ़। पिछले सप्ताह से पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में तापमान काफी गिर गया है। इससे रबी की फसल पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसान इस समय खेत में नमी बनाए रखें। धान का पुआल खेत में फैला दें। छोटे काश्तकारों को खेत के किनारे मेड़ पर धुआं करने से पाले से राहत मिल सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, लेदौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि मौसम खराब होने पर आलू की फसल में फफूद का संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। सुरक्षा की दृष्टि से मैंको जेब एम 45 की 3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। ठंड व कोहरे के बीच चना, सरसों, अरहर एवं सब्जियों की फसल की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। पाले से पत्तियों की कोशिकाएं फट जाती हैं और फसल सूखने लगती है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डाॅ. एमपी गौतम ने बताया कि 8-10 किग्रा सल्फर डस्ट प्रति एकड़ अथवा घुलनशील गंधक 600 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर पाले से फसल को बचा सकते हैं। सदस्य वैज्ञानिक डाॅ. शेर सिंह ने बताया कि मेटालैक्सिल और मैनकोजेब मिश्रित दवा की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर भी छिड़काव किया जा सकता है।