ठेकमा से होकर गुजरी नहर में पानी नदारद। संवाद
ठेकमा। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की नर्सरी डालने का समय चल रहा है, लेकिन क्षेत्र की नहरों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है, इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिन किसानों के पास निजी संसाधन जैसे बोरिंग, ट्यूबवेल या पंपसेट उपलब्ध हैं, वे किसी तरह अतिरिक्त लागत उठाकर नर्सरी डाल रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर किसान सिंचाई के अभाव में पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। नहरों के सूखे रहने से खेतों में नमी की कमी बनी हुई है, जिससे धान की बुवाई का कार्य समय से नहीं हो पा रहा। किसान रामनयन यादव ने बताया कि यदि समय पर नर्सरी नहीं डाली गई तो धान की रोपाई में भी देरी होगी, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। नहर में पानी ना आने के कारण उन्हें निजी पंपसेट का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, किसान बेचू मौर्य ने कहा कि जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, वे अब तक नर्सरी नहीं डाल सके हैं और नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने विभागीय अधिकारियों से जल्द नहर में पानी छोड़ने की मांग की है। सिंचाई विभाग ठेकमा के सींचपाल शेषनाथ ने बताया कि नहरों में पानी 20 से 25 जून के बाद आने की संभावना है। तब तक किसानों को इंतजार करना पड़ेगा।