अंबेडकरनगर के सिझौलिया में नोटबंदी के चलते नहीं बिक पा रहा किसानों का धान।
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धान खरीद का सीजन बीतता जा रहा है लेकिन अभी तक बूढ़नपुर क्षेत्र में धान क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इसके कारण किसानों की मजबूरी का फायदा गल्ला दूकानदार उठा रहे हैं। वे कम दाम पर धान खरीद कर अपनी तिजोरी भरने में जुटे हुए हैं।
बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के अधिकतर लोगों की आजीविका का साधन कृषि है। किसान एक फसल को पैदा करने के बाद उसे बेचकर दूसरी फसल के बुआई की तैयारी करता है। इसके साथ ही वह फसल को ही बेचकर निमंत्रण आदि के खर्चों को पूरा करता है। लगातार दो वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसानों को अपने फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था लेकिन इस बार मौसम की मेहरबानी से किसानों की धान की फसल अच्छी हुई।
किसान इसे बेचकर अपने पुराने घाटे को पूरा करने की आस लगाए हुए थे। लेकिन सरकारी क्रय केंद्र बंद होने से इसकी आशा पर पानी फिर गया है। सरकार किसानों के ए ग्रेड धान को 1510 रुपये प्रति कुंतल और बी ग्रेड धान को 1470 रुपये प्रति कुंतल की दर से लेने की घोषणा की है। बूढ़नपुर क्षेत्र में ज्यादातर क्रय केंद्र पीसीएफ के हैं जिनका अभी मिलरों से कांटेक्ट नहीं हो पाया है। जिसके कारण अभी तक धान की खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
वहीं, किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर क्षेत्रीय दूकानदार किसानों से 800 रुपये प्रति कुंतल की दर से धान खरीद रहे हैं। जिसके कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बाद भी मजबूरी में उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है।