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रंग यात्रा ने अनेकता में एकता का दिया संदेश

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शहर में रंग महोत्सव के दौरान निकाले गये रंग यात्रा में लोक कला का प्रदर्शन करते कला निकेतन कटक के ? - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। नगर के वेस्ली इंटर कालेज में आयोजित हुनर रंग महोत्सव के चौथे दिन रविवार को कलाकारों द्वारा अग्रवाल धर्मशाला परिसर से रंग यात्रा निकाली गई। इस रंग यात्रा में शामिल कलाकार अपने रंग रूप और हैरतअंगेज करतबों से लोगों का मनोरंजन कर रहे थे।
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रंग यात्रा अग्रवाल धर्मशाला से शुरू होकर दलालघाट, कालीनगंज, चौक, मातबरगंज से वापस पुरानी कोतवाली अग्रवाल धर्मशाला पहुंचकर समाप्त हुई। जिसमें सबसे आगे हुनर संस्थान के बच्चे देशभक्ति गीतों पर नृत्य प्रस्तुत करते चल रहे थे। दूसरे स्थान पर जागरूक युवा सेवा संस्थान बलिया के कलाकार अपनी माटी के गीत गाते चल रहे थे। तीसरे क्रम पर पथ जमशेदपुर, चौथे क्रम पर निखिला उत्कल कला निकेतन कटक की टीम संबलपुरी नृत्य प्रस्तुत करते हुए चल रही थी। पांचवें क्रम पर नंद संगीत कला केंद्र खुरदा उड़ीसा के कलाकार अपने पारंपरिक लोक नृत्य काठी घोड़ा को लेकर चल रहे थे। छठवें नंबर पर रॉक स्टार मिर्जापुर और सातवें क्रम पर मुजफ्फरपुर इन बिहार मुदगलपूरी नाट्य कला केंद्र के कलाकार हिजड़ों की अंतर वेदना को प्रस्तुत कर रहे थे। आठवें क्रम पर नटराज नृत्य कला परिषद के कलाकार अपने पारंपरिक परिधानों में चल रहे थे। नवें क्रम पर उत्कल संगीत समाज कटक के कलाकार शिव तांडव प्रस्तुत कर रहे थे। 10वें क्रम पर मणिपुर ड्रैमेटिक यूनियन के कलाकार अपने प्रदेश का लोक नृत्य पेश करते हुए चल रहे थे। इस प्रकार इन कलाकारों के मनमोहक प्रदर्शनों ने नगर वासियों का दिलजीत लिया। इस रंग यात्रा का नेतृत्व अभिषेक जायसवाल दीनू ने किया। वहीं नगर के वेस्ली इंटर कालेज में महोत्सव की चौथी शाम स्व. घनश्याम दास अग्रवाल को समर्पित रही। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत उत्कल संगीत समाज की परिणीता महापात्रा के गायन से हुआ। फिर जागरूक सेवा संस्थान बलिया की स्नेहा, साक्षी सिंह, जयपुर डांस एकेडमी मिर्जापुर के प्रद्युम्न सिंह, दीपानीता ग्रुप से स्मृति कश्यप, वाराणसी के संदीप मौर्य ,अमन सिंह तथा किंग यूनाइटेड के आकाश गुप्ता ने क्रमश: एकल लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य व मॉडर्न डांस प्रस्तुत किया । फिर शुरू हुआ नाटकों का सिलसिला सर्वप्रथम मुद्गगल पुरी नाटक केंद्र मुंगेर बिहार द्वारा स्व. कादर खान द्वारा लिखित मोहम्मद जिलानी द्वारा निर्देशित नाटक ‘अगर यही रफ्तार रही तो’ का मंचन किया गया। नाटक अगर यही रफ्तार रही तो एक हास्य व्यंग नाटक है। इस नाटक में भारत की बढ़ रही जनसंख्या पर कटाक्ष किया गया है और दर्शाया गया है कि अगर इसे रोका नहीं गया। तो वह दिन दूर नहीं जिस दिन भगवान की तरह तस्वीरों में जकड़ जाएंगे। दूसरी प्रस्तुति के रूप में पथ जमशेदपुर द्वारा मोहम्मद निजाम के निर्देशन में ‘‘म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर’’ का मंचन किया गया। इस नाटक का शीर्षक प्रतीकात्मक और व्यंगात्मक है। ठीक उसी तरह नाटक के पात्र भी प्रत्येक आत्मकथा लिए हुए अपनी व्यथा कथा के साथ रूबरू होते हैं। द्वापर, त्रेता, कलयुग हर युग में शास्त्रों से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति.रिवाजों में सदा से पूज्य मानी जाने वाली नारी की जीवन स्थिति के धरातल पर विपरीत दिखती है। पुरुषों की जननी पुरुष पुरुषों की आश्रिता बन जाती है। इस मौके पर डा. पीयूष सिंह यादव, अजेंद्र राय, डा. डीपी राय, राजेंद्र प्रसाद यादव, रमाकांत वर्मा, नीरज अग्रवाल, मनीष रतन अग्रवाल, परितोष रुंगटा, मनोज बनवाल चुनमुन आदि उपस्थित थे। संचालन सुनील दत्त विश्वकर्मा ने किया।

शहर में रंग महोत्सव के दौरान निकाले गये रंग यात्रा में मां काली का रौद्र रुप धरे उड़ीसा के कलाकार?- फोटो : AZAMGARH

शहर में रंग महोत्सव के दौरान निकाले गये रंग यात्रा में मां काली का रौद्र रुप धरे झारखंड के कलाकार?- फोटो : AZAMGARH

शहर में रंग महोत्सव के दौरान निकाले गये रंग यात्रा में मां दुर्गा के रुप में कटक उड़ीसा के कलाकार?- फोटो : AZAMGARH

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