आजमगढ़। नगर के ग्रीनलैंड एरिया में बने कृष्णा इंटर कॉलेज के भवन को गिराने की प्रशासनिक कार्रवाई एक बार फिर गुरुवार को पूरी नहीं हो सकी। लाव-लश्कर के साथ सुबह से ही प्रशासनिक अमला जुटा, लेकिन पूरे दिन की मशक्कत के बाद जिला प्रशासन ने शपथ पत्र देने पर कालेज प्रबंधन को 15 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट का स्टेआर्डर लाने या खुद ही वहां से निर्माण को हटाने का समय दिया है।
कृष्णा कॉलेज के प्रबंधक लालता प्रसाद यादव और हेमंत कुमार यादव की ओर से बिना एडीए से मानचित्र पास कराए ही ग्रीनलैंड एरिया में विद्यालय का निर्माण कराया गया था। जब एडीए ने प्रबंधतंत्र को इसके लिए नोटिस जारी किया तो प्रबंधक ने कोर्ट की शरण ली।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन प्रबंधक को कहीं से भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने भी विद्यालय को ध्वस्त कराने का आदेश दिया। इसके विरुद्घ प्रबंधक की ओर से कहीं भी अपील नहीं की गई। हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के क्रम में गुरुवार को प्रशासन ने विद्यालय के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया था।
डीआईओएस की ओर से भी बच्चों को स्कूल न भेजने की अपील की गई थी। निर्धारित समय पर प्रशासन जेसीबी मशीन के साथ विद्यालय के गेट पर पहुंच गया, लेकिन आदेश के बावजूद प्रबंधक की ओर से कार्रवाई से बचने के लिए गेट पर ही बच्चों को पढ़ने के लिए बैैठा दिया गया था।
प्रशासन बच्चों की छुट्टी होने का इंतजार करता रहा। इसके बाद शाम तीन बजे का समय निर्धारित हुआ। शाम तीन बजे तक छुट्टी होने के बाद भी प्रबंधक ने बच्चों को घर नहीं जाने दिया। बच्चों के अभिभावकों को भी बुला लिया गया।
बच्चों की मौजूदगी के कारण प्रशासन विद्यालय का ध्वस्तीकरण करने से बचता रहा। काफी देर होने पर जिलाधिकारी ने प्रबंधक को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता में जिलाधिकारी ने प्रबंधक को निर्देश दिया कि हाईकोर्ट का आदेश इमारत को गिराना का है।
हमें इसका पालन करना ही है। इसके लिए आपको 15 दिन का समय दिया जाता है। इन 15 दिनों में या तो आप सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश हमें दे दीजिए या फिर स्वयं ही निर्माण को हटा लीजिए। इस बात पर प्रबंधक सहमत हो गए और शर्तों के अनुसार शपथ पत्र दे दिया। पूरे दिन हुई मशक्कत के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुक गई।
छात्र और अभिभावकों को बनाया ढाल
आजमगढ़। जैसे ही प्रशासन ने कृष्णा कालेज की बिल्ंिडग को ढहाने की तारीख मुकर्रर की कालेज प्रबंधन भी उसे बचाने की फिराक में जुट गया। प्रतिदिन क्लास में कुर्सी मेज पर बैठकर पढ़ने वाले छात्रों को गेट के सामने टाट पर बैठाकर और खड़ाकर पढ़ाया जाने लगा।
छुट्टी होने के बाद भी छात्रों को रोके रखा गया। लेट होने पर छात्रों के बारे में जानकारी करने पहुंचे अभिभावकों ने भी कालेज प्रशासन का साथ दिया। इसका परिणाम हुआ कि जिला प्रशासन को मजबूरी में प्रबंधक को 15 दिन की मोहलत देनी पड़ी। कालेज में हाई स्कूल के 66 और इंटर के 21 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसके अलावा छोटी क्लासों में भी बच्चे पढ़ते। हालांकि कालेज पर काफी समय पहले ही नये बच्चों के एडमीशन लेने पर रोक लगाई जा चुकी है।
बच्चों और अभिभावकों ने प्रबंधक ने अपनी ढाल बना लिया था। हम बिल्डिंग तो गिरा सकते हैं, लेकिन जन-धन की हानि नहीं होने दे सकते। इसे देखते हुए प्रबंधक को 15 दिन का समय दिया गया है। अगर इस समयावधि में प्रबंधक ने सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं उपलब्ध कराया या अपने निर्माण को स्वयं नहीं हटाया तो इसे हटाने की कार्रवाई हमारी ओर से की जाएगी। जिलाधिकारी, चंद्रभूषण सिंह