नववर्ष 2015 के पहले दिन गुरुवार को पौ फटते ही आसमान में छाई बदली बरसने लगी। जिसकी वजह से खासतौर पर सुबह नए साल को जश्न मनाने वाले लोग मायूस हो गए, लेकिन किसानों के चेहरे खिल उठे। किसान इस वर्ष अच्छी पैदावार होने की संभावना जता रहें हैं। बरसात का परिणाम रहा कि गुरुवार को दिनभर सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा।
वर्ष 2014 के अंतिम दिन और नववर्ष के स्वागत में बुधवार रात की हुए जशभन की खुमारी अभी उतरी भी नहीं थी, कि गुरुवार की सुबह पौ फटने से पहले ही शुरू हुई बरसात जिले के किसानों के लिए किसी तोहफ से कम नहीं थी। बीते एक सप्ताह पूर्व भीषण कोहरे और ठंड से सभी परेशान थे। इसके बाद ठंड का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा था। बुधवार को सभी वर्ष 2014 की विदाई देर रात तक करने के बाद वर्ष 2015 के स्वागत की तैयारी करने की मंशा से रात को सोए। गुरुवार को लोग नए वर्ष का स्वागत करते उससे पहले ही सुबह आंख खुलते ही लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया। बूंदा-बादी से सड़कों और गांवों में चलना मुश्किल हो गया था। सड़कें कीचड़ से सराबोर हो गई थीं। वहीं दूसरी तरफ इस बरसात से किसानों के चेहरे खिल उठे। खासतौर से ऐसे किसान ज्यादा खुश हैं, जिन्हें अपनी फसलों की सिंचाई करनी थी। किसान हरिश्चंद्र गौड़, प्रेमचंद राय, कुंवर प्रजापति आदि का मानना है कि इस बारिश से दलहनी फसलों को फायदा होगा। वहीं जिन किसानों को गेहूं की सिंचाई करनी थी उनके लिए भी इस बारिश से फायदा होगा। गुरुवार को हुई बारिश के बाद मौसम के खुलने पर फिर से ठंड बढ़ने का अंदेशा लोगों द्वारा लगाया जा रहा है।