महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 122वीं जयंती पर गुरुवार को नगर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं ने नेहरू हाल स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वहीं आयोजित कार्यक्रम में सपा जिलाध्यक्ष ने राहुल स्मृति पत्रिका का विमोचन भी किया।
सुबह राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी के बच्चों द्वारा विद्यालय से रैली निकाली गई। जो विभिन्न मार्गों से होती हुई नेहरू हाल के समीप स्थित राहुल सांस्कृत्यायन की प्रतिमा के पास पहुंची। जहां उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री इंद्रासन सिंह,कन्हैया लाल, दिवाकर तिवारी ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव द्वारा राहुल स्मृति पत्रिका का विमोचन किया गया। अपने संबोधन में हवलदार यादव ने कहा कि राहुल जी के विचार आज अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने पूरी दुनियां को घूमकर देखा, अंवेषण और शोध किया। उन्होंने धर्म की खोज में अनेक धर्मों को अपनाया और अंत में मार्क्सवादी हो गए। इस मौके पर डा. रवींद्र नाथ राय, शिवधन यादव, मीनू राय, रामअधार चौहान, डा. सुजीत भूषण उपस्थित थे।
वहीं, राहुल सांस्कृत्यायन स्मृति केंद्र तत्वावधान में राहुल सांस्कृत्यायन की 122वीं जयंती मनाई गई। शिवम् हायर सेकेंड्री स्कूल के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि विधायक आलमबदी आजमी ने कहा कि शिब्ली एकेडमी राहुल जी पर एक पुस्तक प्रकाशित करे और उसका विमोचन एकेडमी के नवनिर्मित सभागार में किया जाए। इस मौके पर ब्रजेश नंदन पांडेय, तारकेश्वर मिश्र, गिरीश चंद्र चतुर्वेदी, विश्वदेव उपाध्याय, इंदिरा जायसवाल आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव और संचालन प्रभु नारायण पांडेय ने किया।
रानी की सराय : राहुल सांकृत्यायन की 122वीं जयंती पर गुरुवार को उनकी जन्मस्थली पंदहा में राहुल स्मृतिमंच जनपुस्तकालय के तत्वावधान में मनाई गई। इस दौरान प्रभात फेरी निकाली गई। जनपुस्तकालय में आयोजित गोष्ठी में वक्ताआें ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। संयोजक राधेश्याम पाठक ने आभार जताया।
नगर के त्रिशरण बुद्ध बिहार परिसर में गुरुवार को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की 122वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। अपने संबोधन में समिति के प्रबंधक बलिहारी बाबू ने कहा कि इस देश का तब तक कल्याण नहीं होगा जब तक इस देश में वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था पर आधारित श्रेष्ठ मानने की सोच का एक भी बीज जिंदा है। अध्यक्षता भदंत महाकश्यप और संचालन विक्रम राम ने किया। इस दौरान काफी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।