आजमगढ़। सरकार की ओर से एक करोड़ प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा योजना में एक दिन में रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जनपद में मनरेगा मजूदरों की संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी है। शासन की ओर से एक लाख 52 हजार प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन अब अधिकारी और कर्मचारी इनकी संख्या में कमी होने का हवाला दे रहे हैं।
लाक डाउन के दौरान जनपद में लगभग एक लाख 70 हजार लोग आए। सरकार ने इन्हें मनरेगा योजना से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके तहत जनपद में लगभग 40 हजार प्रवासी श्रमिकों का जाबक ार्ड बनाकर रोजगार उपलब्ध कराया। जनपद में एक लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक कार्य करने में जुट गए। इसका परिणाम रहा कि मानव दिवस सृजन में जनपद में पूरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। मनरेगा योजना की कामयाबी को देखते हुए सरकार ने एक दिन में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया। वहीं जनपद को एक दिन में एक लाख 52 हजार लोगों को एक दिन में रोजगार देने का लक्ष्य दिया गया। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटा था। तभी मनरेगा मजदूरों की संख्या बढ़ने के बजाय घटने की सूचना मिली। यह कहा जाने लगा कि बहुत से श्रमिक अब वापस जाने लगे हैं। वहीं कुछ प्रवासी श्रमिक धान की रोपाई करने में जुट गए हैं। इस वजह मनरेगा मजदूरों की संख्या में कमी आई है। इसकी जानकारी होते ही सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला गांव-गांव अपने मातहतों के दिए गए तर्क की पड़ताल करने में जुट गए हैं। गांव में जाकर वो प्रवासियों से इसकी पड़ताल कर रहे हैं।
शासन की ओर से हमें एक दिन में एक लाख 52 हजार श्रमिकों के रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन मजदूरों की संख्या बढ़ने के बजाय कम होने की बात कही जा रही है। इसके लिए जो हवाला दिया जा रहा है उसकी पड़ताल करने के लिए गांव-गांव जा रहा हूं और प्रवासी श्रमिकों से बात कर रहा हूं। - आनंद कुमार शुक्ला, सीडीओ