प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाती पुलिस।
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रौनापार पुलिस ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि दबिश के दौरान कोई मारपीट नहीं हुई। पुलिस को देखकर आरोपी घबराया और उसकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने पर पुलिस वापस लौट गई थी।
परिजनों के मुताबिक, कलामुद्दीन पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित थे और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी। पुलिस के जाने के बाद उनकी तबीयत अचानक और बिगड़ गई। परिजन उन्हें चांदपट्टी स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। इसके बाद आजमगढ़ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। सोमवार दोपहर करीब 12:30 से एक बजे के बीच शव को रौनापार थाने के सामने रखकर प्रदर्शन किया। सूचना पर क्षेत्राधिकारी सगड़ी अनिल कुमार वर्मा, क्षेत्राधिकारी सिटी शुभम, समेत जहानागंज, बिलरियागंज, लाटघाट चौकी और जीयनपुर थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।
थाने के बाहर हंगामा करती भीड़।
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अधिकारियों ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मृतक के परिवार में पत्नी निशा और पुत्र मोहम्मद अनीस, तालिब, आतिफ और आरिफ शामिल हैं। घटना के बाद एहतियातन रौनापार थाना परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे थाना क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि मृतक लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित था और संभव है कि घबराहट के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी हो। इस संबंध में सीओ सगड़ी अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी और तथ्यों के अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।