अभियोजन के मुताबिक, रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एफसीआई कर्मचारी हरिलाल यादव को बैटरी चोरी करने के आरोप में हिरासत में लिया था। उसे थाने के हवालात में रखा गया था। हरिलाल यादव के पुत्र जितेंद्र का आरोप था कि जब वह रात को खाना लेकर रानी की सराय थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी जेके सिंह के ललकारने पर हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह ने पिता हरिलाल यादव को गोली मार दी थी।
घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वारदात के दौरान जितेंद्र यादव और उसके संबंधी रामबचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया था। दूसरे दिन यानी 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
हिरासत में मौत के मामले में रानी की सराय थाने की पुलिस ने हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह पर भी प्राथमिकी दर्ज की थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की सुनवाई 29 जनवरी 2026 को ही पूरी कर ली थी। दोषी करार दिए जाने के बाद जेके सिंह को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया था। अदालत ने बुधवार को सजा सुनाई है।
सीबीसीआईडी ने जांच करके दाखिल किया था आरोप पत्र
अभियोजन के मुताबिक, मामला हाई प्रोफाइल था इसलिए सितंबर 2003 में ही जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई थी। जांच के बाद एजेंसी ने फरवरी 2005 में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान 2017 में हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की मौत हो गई थी। अब जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी जेके सिंह को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
जमानत पर बाहर था जेके सिंह, न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा तो रो पड़ा
अभियोजन के मुताबिक, दोषी जेके सिंह 2003 में ही सेवानिवृत्त हो गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जेके सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था लेकिन जमानत पर बाहर चल रहा था। दोषी करार दिए जाने के अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। तब जेके सिंह रो पड़ा था।