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छोटो पर कार्रवाई कर बड़ों को बचाने में जुटा पुलिस महकमा

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आजमगढ़। एक नहीं दो विदेशी महीनों से जिले में रह रहे थे। फर्जी आईडी बनवा ली। यहां तक कि पासपोर्ट भी बनवा लिया और पुलिस महकमे और खुफिया विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं हुई। एलआईयू, आईबी से लेकर पुलिस महकमे की इसे लापरवाही ही कही जाएगी। जिले में रहने वाले एक अफगानी की वाराणसी में गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमा जागा और इसके बाद दूसरे अफगानी को कोलकाता टीम भेज कर पकड़ लिया, लेकिन अब उसकी भी गिरफ्तारी फूलपुर से दिखाई जा रही है। छोटों पर कार्रवाई कर पुलिस महकमा बड़ों को बचाने ने लग गया है।
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आजमगढ़ पुलिस पर उसी दिन सवालिया निशान लग गए थे जब एक अफगानी नागरिक फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के बने आईकार्ड, आधार व अन्य डॉक्यूमेंट लेकर पासपोर्ट बनवाने वाराणसी स्थित पासपोर्ट कार्यालय पहुंच गया। जिले में इनके रहने की जानकारी ही पुलिस को नहीं थी। अफगानी नागरिक के पकड़े जाने और उसके तार जिले से जुड़े होने की जानकारी होते ही महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया गया। तत्कालीन कोतवाल फूलपुर के नेतृत्व में रविवार को टीम कोलकाता भेज कर एक और अफगानी करमतुल्ला को पकड़ लिया। इसका तो फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के आईडी व डाक्यूमेंट के आधार पर पासपोर्ट चार माह पूर्व बन भी चुका था। एक साथ दो-दो विदेशियों के जिले में महीनों से रहने के बाद भी पुलिस महकमे को इसकी भनक नहीं थी। अब सारा मामला खुल चुका है। रविवार की शाम एसपी त्रिवेणी सिंह स्वयं फूलपुर कोतवाली पहुंचे। कोलकाता से पकड़ कर लाए गए करमतुल्ला से पूछताछ की। डाक्यूमेंट की जांच-पड़ताल में गड़बड़ी पाए जाने पर बीट दरोगा व दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि चार माह पूर्व जारी हो चुके करमतुल्ला के पासपोर्ट के सत्यापन रिपोर्ट पर हस्तारक्षर करने वाले प्रभारी निरीक्षक केके गुप्ता पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कहा तो ये भी जा रहा है कि एडीजी जोन ने कोतवाल पर कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए थे लेकिन बचाने के लिए उन्हें तत्काल कोलकाता भेज दिया गया। वहीं, डीआईजी के निर्देश पर सीओ सिटी आईपीएस इला मारन ने जांच शुरू कर दी है। पूरे प्रकरण में पुलिस विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता की जांच सीओ सिटी कर रहे हैं।
फूलपुर कोतवाली में दर्ज हुआ मुकदमा
इस मामले में रविवार की रात फूलपुर कोतवाली में भी एक मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें करामतउल्ला, आबिद अब्दुल्ला व साहबे आलम को नामजद किया गया है। इसके साथ ही एक अज्ञात का भी नाम मुकदमे में शामिल है। करमतुल्ला को पुलिस कोलकाता से पकड़ कर लायी और एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी फूलपुर से दिखाई जा रही है।
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आईबी को नहीं मिला पूछताछ का मौका
आजमगढ़। विदेशी के पकड़े जाने के बाद बड़े कप्तान ने स्वयं पूछताछ की और फिर न्यायालय भेज कर उसे जेल भेजवा दिया। नियमत: पूछताछ के दौरान पुलिस के साथ ही आईबी व एलआईयू आदि की टीम भी होनी चाहिए थी। अब आईबी टीम को जेल भेजे गये अफगानी को रिमांड पर लिए जाने का इंतजार करना होगा। पुलिस की यह हड़बड़ी कहीं न कहीं गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है।
अब सफाई देने में जुटा पुलिस महकमा
आजमगढ़। एसपी ग्रामीण ने पूरे प्रकरण पर अब सफाई देनी शुरू कर दी है। बताया कि पुलिस के पास पासपोर्ट बनवाने वाले के डाक्यूमेंट सत्यापन का अधिकार ही नहीं है। पहले पुलिस डाक्यूमेंट का सत्यापन करती थी लेकिन अब पासपोर्ट आफिस पर ही सत्यापन का कार्य होता है। पुलिस रिपोर्ट के लिए फाइल आने पर संबंधित थाने के बीट दरोगा व सिपाहियों से जांच कराई जाती है। अफगानी वाले मामले में बीट दरोगा व सिपाहियों ने लापरवाही की है। जिसके लिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
फरिहां स्थित कंप्यूटर सेंटर पर बना फर्जी डाक्यूमेंट
आजमगढ़। एसपी ग्रामीण एनपी सिंह ने बताया कि अफगानी नागरिकों का फर्जी भारतीय डॉक्यूमेंट निजामाबाद के फरिहां बाजार स्थित एक कंप्यूटर सेंटर पर बना है। पुलिस कंप्यूटर सेंटर संचालक को हिरासत में ले चुकी है और उससे पूछताछ की जा रही है। इस पूरे प्रकरण में मुख्य रुप से गड़बड़ी फर्जी डाक्यूमेंट तैयार करने की ही है।
एलआईयू की भूमिका संदिग्ध, बचाने में जुटे अधिकारी
आजमगढ़। विदेशियों के जिले में होने की जानकारी एलआईयू को होनी चाहिए लेकिनएलआईयू को दो-दो अफगानी नागरिकों के होने की ही जानकारी नहीं थी। कायदे से देखा जाए तो एलआईयू इंस्पेक्टर के साथ ही इस पूरे विभाग की भूमिका ही संदिग्ध है। इसके बाद भी पुलिस इस विभाग को बचा रहा है। एसपी ग्रामीण का कहना है कि अब एलआईयू को पासपोर्ट आवेदकों के घर जाकर जांच करने का अधिकार ही नहीं है। एलआईयू सिर्फ आवेदकों की जांच अपने रिकार्ड से करती है।
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