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फार्मासिस्टों की हड़ताल से चिकित्सा सेवा बाधित

Tue, 20 Sep 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
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फार्मासिस्टों को मंगलवार को संबोधित करते होम्योपैथ फार्मासिस्ट संघ के जिलाध्यक्ष बेकारु यादव।
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वेतन विसंगति दूर करने समेत अन्य प्रमुख मांगों को लेकर मंगलवार से सभी सरकारी अस्पतालों के फार्मासिस्ट बेमियादी हड़ताल पर चले गए जिससे पूरी चिकित्सा सेवा प्रभावित रही। इनके समर्थन में नर्स एसोसिएशन, एलटी संघ, होम्योपैथिक फार्मासिस्ट संघ, लैब टेक्नीशियन संघ, एक्सरे संघ के लोगों ने भी काम ठप कर दिया। इनके काम से विरत रहने का परिणाम रहा कि मरीजों डाक्टरों से बीमारी के लिए दवा तो लिखवा ली लेकिन दवा लेने के लिए वे इधर-उधर भटकते रहे।
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   ब्लड बैंक से खून लेने, देने का काम भी पूरी तरह से ठप रहा। खून समय से नहीं मिलने के कारण रक्ताल्पता की शिकार एक महिला रोगी की जान चली गई। नर्सों के काम न करने से अस्पताल में भर्ती मरीज दवा के अभाव में विस्तर पर पड़े कराह रहे थे। उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं दिखा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए संविदा कर्मचारियों की तैनाती की थी लेकिन जानकारी के अभाव और कर्मचारियों के भय के चलते इन्होंने भी चोरी छिपे काम किया।
   जिले में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के अलावा 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 69 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित इन अस्पतालों के जरिए जनता अपना इलाज करवाती है। आंकड़ों के मुताबिक इन अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 15 हजार से अधिक की ओपीडी होती है। नजदीक के अस्पतालों में पड़ोसी जिलों के मरीज भी आते हैं। सरकारी अस्पतालों में रोग के मुताबिक दवाईयां तो डाक्टर लिखते हैं लेकिन दवा देने का काम फार्मासिस्ट करते हैं। मंगलवार की सुबह से ही सभी फार्मासिस्ट अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए। फार्मासिस्टों और नर्सों के हड़ताल पर चले जाने के कारण दवा का वितरण नहीं हो सका और ब्लड बैंक का कार्य पूरी तरह से प्रभावित रहा। पूरे दिन मरीज खून लेने और देने के लिए भटकते रहे रहे।
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 सीबीए एनेमिया की शिकार गंभीरपुर  थाना क्षेत्र के कलंदरपुर गांव निवासी संध्या देवी (50) पत्नी लालचंद को  घर के लोग मंगलवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इमरजेंसी वार्ड में  ड्यूटी कर रहे डा. अजीजी ने बताया कि संध्या को खून की नित्यांत आवश्यकता  थी। परिवार के लोग ब्लड लेने के लिए ब्लड बैंक गए लेकिन वहां फार्मासिस्ट  के न मिलने की वजह से खून नहीं मिल पाया। खून के अभाव में मरीज संध्या की मौत हो  गई। परिवार के लोग संध्या की लाश लेकर घर चले गए।

उधर, हड़ताली फार्मासिस्ट जिला अस्पताल परिसर में स्थित रैन बसेरा में एकत्रित हुए पूरे दिन बैठक कर नारेबाजी कर मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आरपी गौतम और महामंत्री सूबेदार यादव ने बताया कि हमारा संगठन सरकार से छठवां वेतन विसंगति दूर कर सातवें वेतनमान का लाभ, संवर्ग में पदों के सृजन का मानक निर्धारित कर संवर्ग का पुनर्गठन एवं निर्णयों के अनुसार उच्च पदों पर सृजन, स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर फार्मासिस्ट के पद सृजन सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर है। हमारे संगठन को नर्स एसोसिएशन, एलटी संघ, होम्योपैथिक फार्मासिस्ट संघ, लैब टेक्नीशियन संघ, एक्सरे संघ का भी समर्थन मिला है।
  स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने का परिणाम रहा कि अस्पतालों की पूरी चिकित्सा सेवा प्रभावित रही। मेहनगर संवाददाता के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरा में डाक्टरों के साथ फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय मंगलवार को हड़ताल पर रहे। उनके हड़ताल के चलते अस्पताल पर आने वाले मरीजां को परेशानी हुई। मजबूरी में निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी। सीएचसी के अधीक्षक डा. अशोक कुमार ने बताया कि संविदा कर्मियों की छह सूत्री मांग है। उसी को लेकर वे हड़ताल पर हैं।
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