आरटीओ, पुलिस और नगरपालिका की संयुक्त रूप से उदासीनता का परिणाम है कि बीते वर्ष दिसंबर में आटो संचालन के बाबत बनी योजना अधर में रह गई। परिणाम है कि देहाती क्षेत्रों का परमिट प्राप्त करने वाले ऑटो भी नगर क्षेत्र में दौड़ रहे हैं। इसका परिणाम है कि आटो की भीड़ से नगर क्षेत्र हमेशा जाम के झाम से जूझता है। जबकि दिसंबर 2015 में योजना बनी थी कि शहर में सिर्फ उन आटो को प्रवेश मिलेगा, जिनके पास नगर क्षेत्र का परमिट होगा। यही नहीं, टैक्स देने के बाद भी नगर क्षेत्र में ऑटो के लिए कोई स्टैंड की व्यवस्था नहीं है। विभाग की उदासीनता का परिणाम कि जनता भुक्तभोगी बन रही।
बताते चले जिले के संभागीय परिवहन कार्यालय में कुल 6082 ऑटो रिक्शा का पंजीकरण है। यह संख्या पूरे जिले की है। इसमें से मात्र 547 आटो रिक्शा चालकों को नगर क्षेत्र का परमिट प्राप्त है। नगर क्षेत्र को केंद्र बिंदू मानकर आरटीओ विभाग ने पांच स्थान चिन्ह्ति किया है। इसमें आजमगढ़ सदर, दूसरा भंवरनाथ, तीसरा आजमगढ़, चौथा शाहगढ़ और पांचवां सिधारी है। इन स्थानों से 16 किमी का परमिट 547 ऑटो रिक्शा को जारी किया गया है। लेकिन आलम यह है कि देहात क्षेत्रों के ऑटो चालक अपने वाहन में सवारियों को लादकर नगर क्षेत्र में आ रहे हैं।
इसका परिणाम है कि हर दिन पूरा नगर क्षेत्र जाम की जद में आ जाता है। आटो स्टैंड की सुविधा न होने से ये चालक अपने वाहनों को सड़क के किनारे बेतरतीब खड़ा करते हैं। इससे जाम लग जाता है। इससे निजात पाने के लिए बीते वर्ष दिसंबर माह में आरटीओ और नगर पालिका की संयुक्त बैठक हुई। इसमें एएसपी ट्रैफिक भी शामिल थे। इस दौरान नियम बनाया गया कि नगर क्षेत्र का परमिट प्राप्त करने वाले आटो ही शहर में प्रवेश पा सकेंगे।
नई व्यवस्था से आरटीओ विभाग की कमाई बंद होने लगी। इसके चलते मातहतों ने ध्यान देना बंद कर दिया और नियम दरकिनार कर दिया गया। आटो रिक्शा चालक संघ के पदाधिकारी खुद डीएम से मिलकर उनसे जाम से मुक्ति दिलाने की मांग की। डीएम सुहास एलवाई ने इस पर आरटीओ, यातायात और नगर पालिका विभाग को अमल में लाने का निर्देश दिया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और खामियाजा जनता भुगत रही है।
आरटीओ एक आटोरिक्शा को 16 किमी की परिधि तक चलने की परमिट देता है। प्रत्येक मार्ग पर पांच से दस किलोमीटर की दूरी पर स्टैंड बना दिया जाए तो इस समस्या से सभी को निजात मिल जाए। यात्री यह जानेंगे कि उन्हें उनके रूट का आटो कहां से मिलेगा। - कृपाशंकर पाठक, आटो रिक्शा यूनियन संघ के अध्यक्ष
कोर्ट के आदेशानुसार स्टैंड के पास पानी, शौचालय, यात्री टीनशेड होना अनिवार्य है लेकिन शहर में कोई भी ऐसा स्थान नहीं है, जहां इन व्यवस्थाओं के तहत स्टैंड बनाया जा सके। ऐसे में नपा सिर्फ सड़क टैक्स ही वसूलती है। स्टैंड बनाने के लिए जगह तलाश की जा रही है। - ओमप्रकाश, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी
शहर में ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो पर रोक लगाया गया था लेकिन आरटीओ विभाग का सहयोग न मिलने और कर्मचारियों की किल्लत से इस पर ठीक तरीके से अनुपालन नहीं किया जा सका। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए और बेेहतर रणनीति तैयार की जा रही है। - एच रहमान, पुलिस अधीक्षक यातायात