लाटघाट। सगड़ी तहसील के बरडीहा गांव के ग्रामीणों ने बुधवार को बंधे को बचाने के लिए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पोखरा और सेठाकोली गांव के सिवान में बंधे को काटे जाने पर एतराज जताया। कहा कि इससे दर्जनभर से अधिक गांवों के लोग प्रभावित होंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि कुछ गांवों के लोग इस बंधे को हटवाने के लिए अधिकारियों से मिल चुके हैं। इससे पहले रैचंदपट्टी गांव के लोग बंधे को काटने की कोशिश कर चुके हैं। इस कारण वे बंधे की दिन-रात सुरक्षा कर रहे हैं। समाजसेवी आशीष सिंह ने लोगों को आश्वासन दिया कि इस मामले को डीएम और एसडीएम के संज्ञान में लाया जाएगा। इस पर ग्रामीण शांत हो गए। इस मौके पर पूर्व प्रधान राम अजोर सिंह, उमाकांत सिंह, रामबचन राम, राम हरक पासवान, मुकेश प्रजापति आदि उपस्थित थे।
बंधा टूटा तो इन गांवों में डूबेगी फसल
लाटघाट। यह बंधा फसल और घर सुरक्षित करने के लिए बनाया गया था। बंधा टूटा तो बरडीहा, तुलापुर, पोखरा, दयालगंज, सिवान, गंगापुर, कुड़ही, बनियापार, रुद्रपुर, पहाड़पुर, मक्खापुर, सकत रोहुवार, बैदौली, परशुरामपुर, रामपुर, सहनूपुर, मठिया आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब जाएगी।
जिला परिषद ने 90 के दशक में कराया था बंधे का निर्माण
लाटघाट। इस बंधे का निर्माण 1990 से 1995 के बीच जिला परिषद ने कराया था। जब बरडीहा गांव के प्रधान राम अजोर सिंह थे, उस समय जिला परिषद के अध्यक्ष रामजन्म यादव थे। शिक्षक नेता पंचानन ने भी इसमें सहयोग किया था। बरडीहा गांव के ग्रामीणों ने बंधे को बचाने के लिए पहले भी धरना दिया था। जांच में पाया गया कि पानी का बहाव बाधित मिला था, क्योंकि भुसऊल और रैचंदपट्टी के लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए थे।