नोटबंदी के 16वें दिन गुरुवार को भी हालात सामान्य नहीं दिखे। बैंकों पर घंटों कतार में लगने के बाद भी रुपये न मिलने पर लोगों का सब्र टूट रहा है, लोग सड़क पर उतर रहे हैं। गुरुवार को काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की माहुल में रुपये के लिए कतार में खड़ी महिला बेहोश हो गई। बैंक से रुपये न मिलने पर बनकट, माहुल, सरायमीर के संजरपुर में ग्रामीणों ने चक्काजाम किया। इससे चलते विभिन्न मार्गों पर काफी देर तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।
सगड़ी संवाददाता के अनुसार, मुबारकपुर थाना के बनकट बाजार में स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में कई दिनों से कैश नहीं मिल रहा। खाताधारक रोज रुपये के लिए बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। गुरुवार को पुन: बैंक कर्मचारियों ने कैश न होने की बात कहीं तो खाता धारक नाराज हो गए और बनकट बाजार में आजमगढ़-गोरखपुर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एसओ मुबारकपुर संतलाल यादव मौके पर पहुंचे।
10.30 बजे से लगा जाम करीब एक घंटे बाद समाप्त करा दिया। बैंक के शाखा प्रबंधक खुशिहाल ने बताया पैसा नहीं मिलने के कारण वितरण नहीं हो पा रहा है। हमलोगों को भी जलालत झेलनी पड़ रही है। हम लोग आश्वासन देते-देते थक गए। अंबारी संवाददाता के अनुसार, अहरौला थाना के जागापुर गांव निवासी रुखसाना पत्नी खलीफुजुल्ला के बेटे शाहिद की 27 नवंबर को शादी है। यूनियन बैंक माहुल से रुपये निकालने के लिए रुखसाना बीते तीन दिनों से लगातार चक्कर लगा रही है। गुरुवार की दोपहर वह पुन: बैंक के बाहर कतार में खड़ी थी। तभी अचानक बेहोश होकर गिर गई। घटना के बाद अफरातफरी मच गई।
उधर माहुल बाजार में स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक से गुरुवार को कैश न मिलने से नाराज लोगों ने माहुल-अंबारी मार्ग पर जाम लगा दिया। हालांकि एसओ अहरौला अनिल प्रकाश सिंह ने लोगों को समझाकर 20 मिनट बाद जाम समाप्त करा दिया। निजामाबाद संवाददाता के अनुसार, सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर बाजार में स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक से बीते कई दिनों से कैश नहीं मिल रहा। लोग तीन दिनों से बैंक का टोकन लेकर घूम रहे हैं। गुरुवार को भी बैंक में कैश न होने से नाराज लोग फरिहां-सरायमीर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। एसओ सरायमीर योगेंद्र बहादुर सिंह ने किसी तरह से एक घंटे बाद जाम को समाप्त कराया। इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी।