फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां-बाप की खिदमत से मिलती है जन्नत

Tue, 12 Jan 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
मुहल्ला एलवल में सोमवार की रात ईदमिलादुन्नबी जलसे का आयोजन हुआ। जलसे की शुरुआत तिलावते कुरआन पाक से हुई। जलसे को खिताब करते हुए मौलाना हसीब ने कहा कि मां-बाप का दर्जा बहुत ही ऊंचा होता है, जो लोग अपने मां- बाप की खिदमत नहीं करते बुढ़ापे में उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं, ऐसे लोग जहन्नम की आग से बच नहीं सकते।
विज्ञापन



कहा कि मां-बाप की खिदमत के साथ ही नमाज के पाबंद बने। उन्होंने बड़े ही अफसोस के साथ कहा कि इस दौर के मुसलमान बच्चे यह नहीं जानते की नमाज कितने वक्त की पढ़ी जाती है। नमाज की दुआएं कौन-कौन सी हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने दीनी तालीम हासिल किए जाने को कहा, क्योंकि मरने के बाद आप के जरिए की गई नेकी और अल्लाह के लिए की गई इबादत ही आप के साथ जाएगी, बाकी सब कुछ यही रह जाएगा।


मौलाना अख्तर नेपाली ने फरमाया कि अल्लाह के रसूल पर दरुद भेजने वाले को अल्लाह उसकी दस गुनाहे माफ कर देता है और फरिश्ते उनकी सलामती के लिए दुआ करते हैं। एक वाकया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार अल्लाह के रसूल एक वादी में गए तो पहाड़ों से उन पर दरुदो सलाम भेजे जाने की आवाज आने लगी।
विज्ञापन



तब हजरत अली नेह पूछा मेरे आका आप पर कौन दरुद भेज रहा है तो उन्होंने कहा कि पहाड़ की सबसे ऊपर की जो चोटी है वही से आवाज आ रही। ऐसे थे हमारे आका जिन पर पहाड़ भी दरुदो सलाम भेजता है। तो हम इंसान होकर ऐसे रहमतुलआलमीन पर दरुद क्यों नहीं भेजते।


जलसे को हाफिज रमजान, मौलाना अब्दुल्लाह ने खिताब किया। इस मौके पर गुलाम समदानी, मौलाना मुशीर, मौलाना नौशाद, मौलाना एजाज ने अपने नातिया कलाम से हजरत मोहम्मद साहब की सीरत का बयान किया। संचालन जमादुल हसन मुबारकपुरी ने की।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें