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बोरे की किल्लत से नही हो सकी धान की खरीदारी

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क्षेत्र के तमाम किसानों के धान की खरीद बोरे की किल्लत के चलते अभी तक नहीं की जा सकी है। अब व्यवसायी निराश हो चुके किसानों से औने-पौने दाम पर धान का सौदा कर रहे हैं।
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धान खरीद की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित थी। धान की खरीद का कार्य पूरा नहीं होने के कारण खरीद के लिए एक सप्ताह का समय बढ़ाया गया था लेकिन बोरे की व्यवस्था नहीं हो सकी। हाशामतलूबपुर क्रय केंद्र पर लगभग तीन दर्जन किसानों की धान लदी ट्रालियां बोरा उपलब्ध न होने के कारण 1 महीने से खड़ी थी। बोरे के अभाव में इनके धान की तौल नहीं हो सकी। समय सीमा बढ़ने के बाद किसानों को उम्मीद जगी कि अब बोरा केंद्र पर उपलब्ध हो जाएगा लेकिन एक सप्ताह का समय बढ़ने के बाद भी क्रय केंद्र पर बोरे उपलब्ध नहीं हो सके। धान की खरीदारी न होने से किसान काफी मायूस हैं। उनको समझ में यह नहीं आ रहा है कि वह अपने धान को कहां ले जाकर बेचें। अब व्यापारी किसानों से ओने- पौने दामों में सौदा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
किसान धान बेचकर परिवार का भरण- पोषण, बच्चों की पढ़ाई, शादी- ब्याह करते हैं लेकिन धान नहीं बिका। इसका फायदा अब सीधे व्यापारी उठा रहे हैं। औन-पौने दामों पर किसानों से धान खरीद का सौदा कर रहे हैं। किसान बेचारे भी अब क्या करें, उम्मीद भी खत्म हो चुकी है। किसान प्रदीप कुमार सिंह, सत्यजीत सिंह, राजेंद्र प्रसाद यादव, राणा सिंह ने बताया कि हम लोग महीनों से धान लदी ट्राली क्रय केंद्र पर खड़ी किए हुए हैं। तीन सौ रुपये के हिसाब से प्रतिदिन ट्राली का किराया ही जोड़ा जाय तो एक महिने में 9 हजार रुपये हो जाएंगे। धान की लागत भी नहीं निकल पाएगी। धान न खरीदे जाने से किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। इस संबंध में जब पीसीएफ के आरएम प्रशांत त्रिवेदी से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था।
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दस दिन से पीसीएफ के प्रबंधक को बोरे के लिए लिख रहे हैं लेकिन पीसीएफ के लोगों ने बोरा नहीं उपलब्ध कराया जिससे किसानों को भारी क्षति हुई है। बढ़ी समय सीमा भी समाप्त हो गई।- रामकिंकर धर द्विवेदी, एआर कोआपरेटिव
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