आजमगढ़। मंडलीय जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सकों की भारी कमी है। इस कारण मरीजों को ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पा रहा है।
मंडलीय जिला अस्पताल न्यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन न होने से पिछले सालों से ऐसे मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों की बात करें तो 11 स्वास्थ्य केंद्रों पर गायनोलाजिस्ट ही नहीं है। ऐसे में प्रसव के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
जनपद में मंडलीय जिला चिकित्सालय व जिला महिला अस्पताल के अलावा 71 पीएससी और 29 सीएससी हैं। इनमें से 16 नान ब्लाक सीएससी और नौ ब्लाक सीएससी हैं। इनमें कुल 400 बेड हैं।
शासन की गाइडलाइन के अनुसार सीएचसी पर छह एमबीबीएस, पीएचसी पर दो और अतिरिक्त पीएचसी पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। बावजूद इसके अधिकांश सीएचसी पर दो या तीन व पीएचसी पर एक-एक डॉक्टर ही तैनात हैं।
कई अस्पतालों में विशेषज्ञ तो दूर, एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती भी नहीं की गई है। आवास की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण कई अस्पतालों में डॉक्टर रात्रि निवास नहीं करते हैं।
एमबीबीएस चिकित्सकों की स्थिति
जिले में अगर एमबीबीएस चिकित्सकों की स्थिति पर नजर डालें तो कुल 72 पद स्वीकृत हैं। इनमें 45 चिकित्सकों की तैनाती है लेकिन 27 पद रिक्त चल रहे हैं। इन्हें भरने के लिए विभाग की ओर से आवेदन मांगे गए थे। 27 पदों के लिए कुल 102 लोगों ने आवेदन किया है। अब उनकी तैनाती के लिए इंटरव्यू होना बाकी है।
विगत सात-आठ सालों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। यह तैनाती शासन स्तर से होनी है। इसके लिए हमारी ओर से पत्र भेजा जाता है। एमबीबीएस चिकित्सकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। 102 आवेदन आए थे इसमें से कमियों के कारण कुछ फार्म निरस्त हो गए हैं। जो बचे हैं जल्द ही डेट निर्धारित कर इंटरव्यू कराकर तैनाती कराई जाएगी। -डा. अशोक कुमार, सीएमओ।