बलरामपुर। चिलचिलाती धूप में जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए राहत देने वाली खबर है। इमरजेंसी वार्ड और पर्ची काउंटर पर ही मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए ओआरएस घोल की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 20-20 लीटर के वाटर कूलर मंगवाए गए हैं। इनमें ओआरएस घोलकर मरीजों के लिए रखा गया है। इससे मरीजों को लू और गर्मी से राहत मिलेगी। इसके साथ ही चार एसीयुक्त वार्ड को अतिरिक्त रखा गया है, जहां पर करीब 96 मरीज भर्ती हो सकेंगे। इसके साथ ही परिसर के सभी पंखों को भी दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्मी में सभी लोगों के लिए ओआरएस का घोल बहुत जरूरी है। गर्मी और धूप के कारण शरीर में पानी की कमी के साथ ही अन्य दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ओआरएस का घोल पीने से लोगों को समस्याओं से बचाया जा सकता है। जिला अस्पताल प्रशासन की पर्ची काउंटर के साथ ही इमरजेंसी परिसर में भी मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए ओआरएस का घोल पीने के लिए दिया जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि चिकित्साधिकारी गर्मी को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड, एक महिला वार्ड, एक पुरुष वार्ड और एक अतिरिक्त वार्ड बनाया गया है। इसमें कुल करीब 96 मरीज भर्ती हो सकते हैं। 20 लीटर का वाटर कूलर मंगवाए गए हैं। पर्ची काउंटर व इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ओआरएस घुला पानी पीने को मिल रहा है। इससे मरीजों को राहत मिल रही है। ओपीडी परिसर के सभी पंखों को ठीक करवा दिया गया है। भर्ती मरीजों को भी गर्मी से बचाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।
दूसरे दिन भी 41 डिग्री पर डिगा रहा पारा, पूरे दिन गर्म हवा ने झुलसाया
जिले में दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी पारा 41 डिग्री सेल्सियस पर ही डिगा रहा। आग उगल रहीं सूरज की किरणें व गर्म पछुआ हवा से लोग बेहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों व मुख्य मार्ग के किनारे लगे खराब हैंडपंप लोगों की परेशानी और बढ़ा रहे हैं।
वैशाख मास के दूसरे सप्ताह में पारा 41 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। साथ ही तेज गर्म हवा भी लोगों को झुलसा रही है। गर्म हवा के कारण विद्युत उपकरण भी लोगों को कोई खास राहत न दिला सके। इस बीच बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती से लोगों को गर्मी से बेहाल देखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उमस भरी गर्मी से बचने के लिए बाग-बगीचों का सहारा लेने को मजबूर रहे। जबकि शहरी क्षेत्रों में लोग विद्युत उपकरण पर ही निर्भर हैं। मौसम के मिजाज में फिलहाल नर्मी के संकेत न मिलने के कारण लोगों को जेठ मास में होने वाली तपन की चिंता सताने लगी है।