प्राथमिक विद्यालय बासूपार का हुआ कायाकल्प।
- फोटो : अमर उजाला
विद्यालय परिसर में बच्चों को झूलने के लिए झूला लगाया गया है। जिसका बच्चे आनंद उठा रहे हैं। कमरे में टाइल्स और एसीपी लगाई गई है। विद्यालय परिसर में इंटरलाकिंग की गई है। दीवारों पर महापुरुषों के चित्र बनाए गए हैं। ज्ञान से संबंधित स्लोगन लिखा गया है। बच्चों को पानी पीने के लिए आरओ लगाया गया। विद्यालय का आकर्षण ढंग से सजाया गया है।
करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना यह हाईटेक विद्यालय अब किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं दिखता। पहले जहां इस स्कूल में 55 बच्चे थे, अब उनकी संख्या 90 से अधिक हो गई है। स्कूल की सुंदरता, सुविधाएं और स्मार्ट व्यवस्थाएं बच्चों के साथ अभिभावकों को भी खूब लुभा रही हैं।
करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना यह हाईटेक विद्यालय अब किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं दिखता। पहले जहां इस स्कूल में 55 बच्चे थे, अब उनकी संख्या 90 से अधिक हो गई है। स्कूल की सुंदरता, सुविधाएं और स्मार्ट व्यवस्थाएं बच्चों के साथ अभिभावकों को भी खूब लुभा रही हैं।
खेल-कूद और व्यावहारिक शिक्षा पर भी फोकस
विद्यालय में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए खेलकूद की विशेष व्यवस्था की गई है। वैज्ञानिक प्रयोग और प्रायोगिक शिक्षा के माध्यम से छात्र अब ज्ञान को केवल पढ़कर नहीं, बल्कि करके भी सीख रहे हैं।
खेलकूद की नई मशीने पाकर खिल उठे बच्चे।
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प्रकृति के साथ संतुलन भी मिसाल
स्कूल निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नहीं काटा गया, बल्कि परिसर में अधिक से अधिक पौधारोपण किया गया। इससे छात्रों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित होगा।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल वहाब खान ने बताया कि मैं भी प्राथमिक विद्यालय से पढ़ा हूं, जब मैं प्रधान बना तो मेरे मन में जिज्ञासा हुई, कि बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं। जिसके लिए मैंने ग्राम निधि से बच्चों को बैठने के लिए डेस्क ब्रेंच बनवाया, एसी लगवाया। हर कमरे का टाइलीकरण कराया गया है, डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है जो वाई फाई से युक्त है,हर कैमरे में सीसी कैमरा लगाया है। बच्चों को झूलने के लिए झूला लगाया गया है। बच्चों को खाने के लिए ड्राइंग टेबल बनाया गया है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्रा ने बताया कि मेरे मन में हमेशा जिज्ञासा रहती थी कि इस विद्यालय को कैसे सजाया जाए और सुसज्जित किया जाए ताकि एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। जिसका नतीजा है कि आज यह विद्यालय मॉडल के रूप में विकसित किया गया, विद्यालय सारी सुविधाओं से लैस है।