शहर के ठंडी सड़क पर छाये घने कोहरे में बीच गुजरते लोग।
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आजमगढ़। जनपद में ठंड ने अब अपना पांव पसारना शुरू कर दिया है। शनिवार को घने कोहरे के बीच लोगों ने आंख खोली। हालांकि 10 बजे तक कोहरा छंट गया लेकिन पछुआं हवाओं के कारण गलन में कुछ इजाफा जरूर रहा। तापमान में मामूली ही सही लेकिन गिरावट दर्ज की गई। छुट्टी का दिन होने के कारण बहुत से लोग घरों में ही दुबके रहे।
विगत 24 घंटे में जिले के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई। शुक्रवार को जनपद का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। शनिवार को अधिकतम तापमान दो डिग्री कम होकर 23 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया जबकि न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस ही रहा। हालांकि तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई लेकिन इससे ही गलन में इजाफा हो गया। शनिवार की सुबह घना कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण कुछ दूरी तक देखना भी मुश्किल हो रहा था। रात को बूंदाबांदी हुई थी। सुबह घने कोहरे के बीच लोगों ने आंख खोली। सड़कों पर टहलने के लिए निकलने वाले लोगों की संख्या काफी कम रही। सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहनों की रफ्तार भी काफी कम रही। सुबह 10 बजे के बाद कोहरा छंटा। दोपहर के बाद कुछ देर के लिए धूप भी निकली लेकिन कुछ देर बाद ही सूर्य बादलों की ओट में छिप गया। जिसके कारण गलन बढ़ गई। शाम होते ही कोहरे ने फिर से अपनी चादर को फैलाना शुरू कर दिया।
बूंदाबांदी के बीच मौसम ने बदले तेवर
मेंहनगर। शुक्रवार की देर शाम एकाएक मौसम ने तेवर बदले और कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हुई। जिससे ठंड बढ़ी और किसानों की मुसीबत भी बढ़ गई। अभी तहसील क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत किसान धान की मड़ाई और गेहूं की बुवाई नहीं कर पाएं हैं। अब अन्नदाताओं को पिछड़ने का जहां डर सता रहा हैं, वहीं तैयार धान की फसल को क्रय केंद्र तक नहीं पहुंचने से वर्षा में भीगने का डर सताने लगा है। किसान परेशान निगाहों से आसमान की तरफ देखने के लिए बाध्य है। जिन किसानों ने दलहन और तिलहन की फसलों की समय से बुवाई की है उनके लिए बारिश होती है तो यह किसी वरदान से कम नहीं है।