शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल में सर्जिकल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी शुक्रवार से शुरू हो गई। पहला दिन होने के चलते जिला अस्पताल व सीएचसी की ओपीडी में बहुत भीड़ तो नहीं देेखने को मिली, लेकिन जो भी मरीज इलाज को पहुंचे थे उन्होंने राहत की सांस ली है।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते रफ्तार के चलते शासन ने अप्रैल माह में सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी को बंद कर दिया था। इसके पीछे कारण भीड़ को रोकने व कोरोना संक्रमण पर लगाम की कवायद बतायी गई थी। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सर्वाधिक परेशानी आम जनता को उठानी पड़ी। सरकारी अस्पतालों पर इलाज के लिए गरीब तबका पहुंचता है। ऐसे में उसके समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो गई। प्राइवेट अस्पतालों व झोला छाप डॉक्टरों से उन्हें मुंहमांगी कीमत चुका कर इलाज कराना पड़ रहा था। वर्तमान में कोरोना का संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित हो गया है। जिसे देखते हुए सरकार ने शुक्रवार से ओपीडी शुरू करने का निर्देश जारी किया था। जिला अस्पताल पर शुक्रवार को सर्जिकल ओपीडी में डॉ. संतोष गुप्ता मौजूद रहे। पहले दिन कुल 23 मरीज ओपीडी में पहुंचे थे। वहीं जिला अस्पताल पर फ्लू कार्नर भी स्थापित किया गया था। मेंहनगर संवाददाता के अनुसार स्थानीय सीएचसी पर प्रभारी डॉ. देवमणि के अलावा अन्य डॉक्टर भी मौजूद रहे। पहले दिन सीएचसी पर कुल 50 मरीज पहुंचे थे। लाटघाट संवाददाता के अनुसार स्थानीय सीएचसी पर प्रभारी डॉ. सौरभ मौर्य की ओपीडी में 30, डॉ. अच्युतानंद के ओपीडी में 20 मरीज आए। वहीं सीएचसी हरैया पर प्रभारी देवानंद ने 20 व डॉ.एमके गुप्ता ने 15 मरीजों को देखा। अहरौला संवाददाता के अनुसार सीएचसी पर प्रभारी डॉ योगेश कुमार गौतम, डॉ सुरेंद्र प्रताप, डॉ. ओम प्रकाश चौरसिया, डॉ सुनीता पांडे ओपीडी में मौजूद रहे। कुल 15 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जहानागंज संवाददाता के अनुसार सीएचसी कोल्हूखोर पर डॉ. धनंजय, डॉ. स्वपनिल व डॉ. वंदना ओपीडी में मौजूद रहे। कुल 53 मरीज पहुंचे थे।